Soch Badalna Hoga

सोच बदलना होगा | Soch Badalna Hoga

सोच बदलना होगा

( Soch Badalna Hoga )

 

गर समन्दर में रहना है
तो तैरना सीखना होगा…
मौजों से खेलना है अगर
तो उनसा बनना होगा…..
पुरानी सोच और सतही तरीके
को बदलना होगा….
अब नये तरीकों पर हाथ
आज़माना होगा…..
काग़ज़ वही रहेगा क़लम भी वही होगा,
लफ़्ज़ों का चुनाव मगर बदलना होगा,
हर दौर में प्रतियोगिताएं होती रही हैं,
यह दौर भी वही है…..
दुनिया के कदम से कदम मिलाना है तो,
अपनी सोच के रफ्तार को बढ़ाना होगा,
मक़सद पाने की चाहत
अगर है दिल में……
फिर‌ पांव के छालों पे नहीं
नज़र मंजिल पे रखना होगा,
मुश्किलें तो हर रहगुज़र के साथ होंगी,
उनसे लड़कर ही आगे बढ़ना होगा!

Aash Hamd

आश हम्द

( पटना )

यह भी पढ़ें :-

हम दिल से हारे | Hum Dil se Hare

Similar Posts

  • हम ने देखा है | Ghazal Hamne Dekha hai

    हम ने देखा है ( Hamne dekha hai ) नारसीदा से किसी पैमान सी। हर ख़ुशी है कॉंच के गुलदान सी। हम ने देखा है बहुत ही ग़ौर से। ज़िन्दगी है जंग के मैदान सी। कहने को दाना बहुत है दिल मगर। हरकतें करता है कुछ नादान सी। काम देखो तो हैं शैतां से बुरे।…

  • तलवार दी गई | Talwar di Gayi

    तलवार दी गई ( Talwar di Gayi ) ख़ुद पर ही वार करने को तलवार दी गईथाली में यूँ सजा के हमें हार दी गई गर्दन हमारी यूँ तो सर-ए-दार दी गईफिर भोंकने को जिस्म में तलवार दी गई कहने को हम खड़े थे अज़ीज़ों के दर्मियांमंज़िल हमीं को और भी दुश्वार दी गई हमने…

  • ग़लती हमारी थी | Galti Hamari thi

    ग़लती हमारी थी ( Galti hamari thi )   हुआ जो हादसा ए इश्क़ वो गलती हमारी थी खड़ी सरकार के हक़ में लड़ी आवाम सारी थी। लगेंगी तोहमतें हम पर बहुत ये इल्म़ था हमको वही अच्छे वही सच्चे हमें ये जानकारी थी। वफ़ा करके भी हम हरदम खटकते हैं नज़र में क्यूं यही…

  • मेरे भीतर | Rajni ki Ghazal

    मेरे भीतर ( Mere Bheetar ) चढ़ा अपने सनम के इश्क़ का पारा मेरे भीतरग़ज़ल कहने का मौज़ूं है बड़ा प्यारा मेरे भीतर रवानी बन गई है प्रेम की धारा मेरे भीतरहै ए’लान-ए-बहाराँ-सा ये इकतारा मेरे भीतर कहूँ कैसे मैं तुमसे दिल है बेचारा मेरे भीतरन जाने कबसे है पागल ये बंजारा मेरे भीतर तुम्हारे…

  • मैं दिल से ख़ूबसूरत हूँ | Khoobsurat Shayari

    मैं दिल से ख़ूबसूरत हूँ ( Main dil se khoobsurat hoon )   मैं अपने आप में जो आज इक ज़मानत हूँ किसी की नेक इनायत की ही बदौलत हूँ जो मुझको छोड़ गया था मेरे भरोसे पर मैं आज तक ही उसी शख़्स की अमानत हूँ ज़माना शौक से पढ़ने लगा है यूँ मुझको…

  • मर जायेगा | Ghazal Mar Jayega

    मर जायेगा ( Mar Jayega )   तू जो छोड़ेगा तो बेमौत ही मर जायेगा शाख से टूट के पत्ता ये किधर जायेगा। उसके वादे का क्या है वो तो करेगा लेकिन ऐन वो वक्त पे वादे से मुकर जायेगा। इन दिनों ही है खुली उसकी हकीक़त मुझ पे लग रहा अब वो मेरे दिल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *