ग़ज़ल

  • मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं

    मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैं मुहब्बत में वफ़ा-परवर खड़े हैंलगा के ताज को ठोकर खड़े हैं न थामा हाथ भी बढ़कर किसी नेयूँ तन्हा हम शिकस्ता-तर खड़े हैं करूँ कैसे तुम्हारा मैं नज़ाराज़माने में सौ दीदा-वर खड़े हैं शजर आता न कोई भी नज़र अबबशर सब धूप में थक -कर खड़े हैं मिरे ज़हनो गुमाँ…

  • सभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले

    सभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले सितम ही सहते रहे वो तो ला-मकाँ निकलेसभी बशर यहाँ के यार बे-ज़बाँ निकले न कल ही निकले न वो आज जान-ए-जाँ निकलेकि चाँद ईद के हैं रोज़ भी कहाँ निकले तबाही फैली कुदूरत की हर तरफ़ ही यहाँकहाँ कोई भी मुहब्बत का आशियाँ निकले रहे-वफ़ा में न…

  • धूल को फूल बनाने वाले

    धूल को फूल बनाने वाले धूल को फूल बनाने वालेराग औ रंग सजाने वाले अब नही साथ निभाने वालेलाख कसमें वो उठाने वाले सब खरीद्दार ही निकले देखोरूह तक आज वो जाने वाले कर रहे बात यहां उल्फ़त कीदिल में वो आग लगाने वाले कुछ नही पास हमारे अब हैरंक से आज बताने वाले क्या…

  • मिस्टर मनमोहन जो थे सबको भाने वाले थे

    मिस्टर मनमोहन जो थे सबको भाने वाले थे मिस्टर मनमोहन जो थे, सबको भाने वाले थे,सोचा भी नहीं था कल तक, वो भी जाने वाले थे। ध्रुव तारा सा, आसमान में , चमकेंगे, इस कारण भी,अर्थशास्त्र में, ऊंची-ऊंची, डिग्री पाने वाले थे। संकट में भी मुल्क को जब साहस की पड़ी ज़रूरत थी,मौनी बाबा बनकर…

  • मुझे गहराई का चस्का लगा था

    मुझे गहराई का चस्का लगा था मुझे गहराई का चस्का लगा थातभी इक झील में डूबा हुआ था हक़ीक़त का मज़ा अपना मज़ा हैमुहब्बत का नशा अपना नशा था हुई जब गुफ़्तुगू ऐसे खुला वोकोई मोती जो सीपी में छिपा था तुम्हारा दिल महक कैसे रहा हैतुम्हारा दिल तो पत्थर का सुना था बता देता…

  • समझते ही नहीं | Samajhte hi Nahi

    समझते ही नहीं वो मुहब्बत को मेरी कुछ क्योंकर समझते ही नहींप्यार के वादों पे अब तो वो उछलते ही नहीं एक हम हैं जो उन्हें देखे सँभलते ही नहींऔर वो हैं की हमें देखे पिघलते ही नहीं मिल गये जो राह में हमको कभी चलते हुएइस तरह मुँह फेरते जैसे कि मिलते ही नहीं…

  • परवरदिगार दे

    परवरदिगार दे तासीरे-इश्क़ इतनी तो परवरदिगार देदेखे मुझे तो अपनी वो बाँहें पसार दे यह ज़ीस्त मेरे साथ ख़ुशी से गुज़ार देइस ग़म से मेहरबान मुझे तू उबार दे मुद्दत से तेरे प्यार की ख़्वाहिश में जी रहायह जांनिसार तुझ पे बता क्या निसार दे इतनी भी बे नियाज़ी मुनासिब नहीं कहींजो चाहता है वो…

  • इस जहाँ से मुझे शिकायत है

    इस जहाँ से मुझे शिकायत है इस जहाँ से मुझे शिकायत हैक्यों दिलों में यहाँ हिकारत है गुल खिला लो अभी मुहब्बत केजान जाओ यही इबादत है क्यों किसी से करें मुहब्बत हमजब सभी की लुटी शराफ़त है उँगलियाँ वक्त पर करो टेड़ी ।ये पुरानी सुनो कहावत है प्यार करना कोई गुनाह नहींधोखा देना बुरी…

  • तुम्हारे दर्द रह रह कर के तड़पाते अभी भी हैं

    तुम्हारे दर्द रह रह कर के तड़पाते अभी भी हैं तुम्हारे दर्द रह रह कर के तड़पाते अभी भी हैं,तुम्हें हम प्यार दिलबर करके पछताते अभी भी हैं । कई आए गए मौसम जुलाई से दिसम्बर तक,मेरी पलकों की किस्मत में तो बरसाते अभी भी हैं । कहे थे लफ़्ज़ जो तुमने मेरे कानों में…

  • बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँ

    बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँ बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँतेरी आँखों में सागर देखती हूँ हुई मा’दूम है इंसानियत अबहर इक इंसान पत्थर देखती हूँ पता वुसअत न गहराई है जिसकीवो सहरा दिल के अंदर देखती हूँ हुनर ज़िंदा रहेगा है ये तस्कींमैं हर बच्चे में आज़र देखती हूँ न ग़ालिब और कोई…