दिल्लगी अच्छी नहीं है

दिल्लगी अच्छी नहीं है

यक़ीं मानो मिरे जानी नहीं हैं।
ज़ियादा दिल्लगी अच्छी नहीं है।

किसी पर मालो-दौलत के जबल हैं।
किसी पर एक भी रत्ती नहीं है।

दसों कर डाले उसको फ़ोन लेकिन।
वो आने के लिए राज़ी नहीं है।

ख़ुशी से सैंकड़ों मेह़रूम हैं,पर।
ग़मों से कोई भी ख़ाली नहीं है।

हज़ारों राज़ पोशीदा हैं इसमें।
हमारी बात बे – मअ़नी नहीं है।

किसी के ख़ैर ख्वां लाखों हैं लेकिन।
किसी का कोई भी ह़ामी नहीं है।

बनी है किस तरह दुनिया ये गुत्थी।
करोड़ों दिन में भी सुलझी नहीं है।

जो शय कल मुफ़्त मिल जाती थी यारो।
वो अब अरबों में भी मिलती नहीं है।

हमारे जैसे मिल जाएंगे खरबों।
फ़राज़ उसका कोई सानी नहीं है।

सरफ़राज़ हुसैन फ़राज़

पीपलसानवी

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • तलवार दी गई | Talwar di Gayi

    तलवार दी गई ( Talwar di Gayi ) ख़ुद पर ही वार करने को तलवार दी गईथाली में यूँ सजा के हमें हार दी गई गर्दन हमारी यूँ तो सर-ए-दार दी गईफिर भोंकने को जिस्म में तलवार दी गई कहने को हम खड़े थे अज़ीज़ों के दर्मियांमंज़िल हमीं को और भी दुश्वार दी गई हमने…

  • हर घड़ी इस साल की

    हर घड़ी इस साल की हो मुबारकबाद सबको हर घड़ी इस साल कीसाल भर रौनक़ रहे घर घर में इस्तकबाल की कीजिएगा सब दुआएं उम्र भर फूले फलेंदिल को छू पाये नहीं कोई हवा जंजाल की गुज़रे ऐ मौसम बहाराँ तू चमन में इस तरहख़ूबसूरत ज़िन्दगी हो हर शजर हर डाल की दूध माखन और…

  • रहे दिलों में मुहब्बत वतन की

    रहे दिलों में मुहब्बत वतन की दुआ मांगता हूँ हमेशा अमन की ?रहे दिलों में मुहब्बत वतन की न बरसात हो नफ़रतों की कभी भीसलामत रहे बस बहारें वतन की मेरी जान कुर्बान है इस वतन परयहीं आरज़ू है मेरे यार मन की वतन से करो प्यार इतना दिलों सेहमेशा महके हर कली ही चमन…

  • रुलाती हमको | Ghazal Rulati Humko

    रुलाती हमको ( Rulati Humko ) खिलातीं रोज़ गुल ये तितलियाँ हैं हुई भँवरों की गुम सब मस्तियाँ हैं हमारे साथ बस वीरानियाँ हैं जिधर देखो उधर तनहाइयाँ हैं ग़ज़ब की झोपडी में चुप्पियाँ हैं किसी मरते की शायद हिचकियाँ हैं रुलाती हमको उजड़ी बस्तियाँ ये कि डूबी बारिशों में कश्तियाँ हैं मुसीबत में नहीं…

  • आसां नहीं होता | Ghazal Aasan Nahi Hota

    आसां नहीं होता ( Aasan Nahi Hota )   बज़ाहिर लग रहा आसां मगर आसां नहीं होता बहुत दुश्वार उल्फ़त का सफ़र आसां नहीं होता। ज़मीं एहसास की बंजर अगर इक बार हो जाये लगाना फिर मुहब्बत का शजर आसां नहीं होता। सुनो अहदे वफ़ा करना अलामत इश्क़ की लेकिन निभाना अहद यारों उम्र भर…

  • इस जमाने में | Ghazal Is Zamane Mein

    इस जमाने में ( Is Zamane Mein )  जुबां को थोड़ी सी असरदार कीजिए, करो जब भी बात, वजनदार कीजिए। =================== कलंक पसरा है इतना संभल के इनसे, जहान में बेदाग,तुम किरदार कीजिए। =================== कभी किसी से मिलो,लगे मिला कोई, दुखे दिल,रिश्ता ऐसा दमदार कीजिए। =================== शराफ़त न ढूंढो इस जमाने में यार मेरे, सभंल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *