विवेचना

  • शांति रूपी धन

    गर्मियों के दिनों में भी अक्सर कमाई करने के उद्देश्य से अधिकांश निर्धन लोग कुछ न कुछ व्यवसाय जरूर करते हैं, ऐसे ही एक घटना है जबलपुर स्थित कृष्णा नगर की एक शरीर से दुर्बल, पतले, दुबले बूढ़े व्यक्ति हाथ कंपकपाते हुए चेहरा गर्म हवा के थपेड़ों से झुलस चुका था। बच्चे भी बड़े हो…

  • प्राइवेट स्कूलों का गोरखधंधा

    स्कूल बने कॉपी-किताब की दुकान, अभिभावक परेशान। निजी स्कूलों की मनमानी पर कैसे लगेगी लगाम? देश भर में के प्राइवेट स्कूलों में कॉपी किताबों के नाम पर बड़ा खेल चल रहा है। बाजार से अधिक दामों में लूट मचा रखी है। प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की मनमानी से परेशान…

  • हिन्दी साहित्य में स्त्री-लेखिकाओं की स्थिति व उपस्थिति

    भारत में स्त्रियाॅं प्राचीन काल से लेकर साहित्य के जरिए अपनी अस्मिता को ढूॅंढने का प्रयास करती रही हैं। यह बात और है कि साहित्य के इतिहास में उनकी उपस्थिति न के बराबर मानी गई है। अन्य साहित्य की भाॅंति स्त्री-साहित्य का जन्म कविता से हुआ है। सन् 1388 से 1545 तक के युग को…

  • दलितों से डर क्यों?

    भारत में आर्यों के प्रवेश के सैकड़ों वर्षों बाद तक यहां वर्ण व्यवस्था नहीं थी हालांकि जातियां थीं ऐसा सनातनी ग्रंथों से मिलता है। जबकि वेदसूत्रों में प्रायः नहीं है । आर्यों -अनार्यों यानि देवों-असुरों के संघर्षों की कथाएं जगजाहिर हैं।‌‌ अनार्य यहां के मूल निवासी हैं जबकि आर्य यूरेशियन मूल के। आचार्य चतुरसेन शास्त्री…

  • ज्येष्ठ माह के मंगलवार का महत्व

    प्रभु श्री राम जी के प्रिय भक्त हनुमान जी महाराज की महिमा अपार है उनके कृपा का अनुभव उनके भक्त सहज ही राम नाम का जप करते हुए हमेशा करते आये हैं। ज्येष्ठ माह का प्रत्येक मंगल वार अपने आप में ही परिपूर्ण है इन मंगलवार के दिनों मे भक्त जन तन जला देने वाली…

  • सीता मैया | Sita Maiya

    जानकी देवी कई वर्षों बाद बिहार के छोटे से कस्बा नुमा गांव लोदमा में अपनी छोटी बहन रूपाली के यहां कल रात्रि में आई और आज सवेरे सवेरे प्रातः बेला छोटी बहन के मकान के सामने खाली जमीन पर लगी हुई सब्ज़ियों कुछ गोभी कुछ मूली के पौधे कुछ धनिया पत्ती कुछ टमाटर कुछ बैगन…

  • प्रकृति सिद्धांत प्रतिपादन

    एक सा वातावरण में रहते-रहते हम सब बहुत कुछ अपने जीवन में ग्रहण करते हैं।यही प्रकृति,पूर्व मानव के बीच का भी सिद्धांत है। ब्रह्मांड की संरचना मानव के अनुकूल हुई है । प्रकृति से ही शिक्षा-ग्रहण कर हम सभ्यता की गाड़ी को बहुत ऊपर ले आए।जितना विकास किए वह सारे के सारे आधारित प्राकृतिक सिद्धांत…

  • राम काज करिबै को आतुर

    जिस प्रकार से हनुमान जी महाराज को राम काज अर्थात अपने मालिक द्वारा निर्देशित कार्यों की आतुरता थी , वह धीरे-धीरे खत्म सी होने लगी है। वर्तमान समय में अक्सर देखा जा रहा है कि लोग अपने मालिकों से धोखेबाजी करने लगे हैं । उनमें वह कार्य करने के प्रति उत्साह नहीं दिखलाई देता है…

  • मेघवाल समाज | Meghwal Community

    मेघवाल समाज मेघवाल क़ौम बड़ी मेह़़नतकश अध्यात्मिक दयालू प्रवृति की सादगी पसंद हुनरमंद रही है पुरूष ऊनी सूती की बुनाई का काम एंव यदाकदा चमड़े की जूतियां तक बनाने का कार्य कर अपने परिजन की जीविका उपार्जन करते है तथा महिलाऐं कपड़े पर अपनी हस्तकला में दक्ष कशीदाकारी (भरत) का बेजोड़ काम करती है ।…

  • बदलते परिवार | Badalte Parivar

    परिवार का सही मतलब तो पहले समझ में आता था। आजकल तो परिवार चार दिवारी में “हम दो हमारे दो” के बीच में सिमट कर रह गया है! पहले ना सिर्फ परिवार में लोग मिल-जुलकर रहते थे। बल्कि भजन और भोजन भी संग में होता था। फिर भी संयुक्त परिवार की मिसाल आज भी कई…