Category: शेरो-शायरी

  • आयी देखो फुहार सावन की | Aazam Poetry

    आयी देखो फुहार सावन की ( Aayi dekho phuhaar sawan ki )     आयी देखो फुहार सावन की ! खिल रही है बहार सावन की   बूंदों में सरगम उल्फ़त की ऐसी दिल करे  बेक़रार सावन की   प्यास तन की जाने बुझेगी कब कर रहा  इंतिजार सावन की   गीत गाये ग़ज़ल यादों…

  • बेवफ़ाई का इशारा कर गया | Bewafa par Ghazal

    बेवफ़ाई का इशारा कर गया ( Bewafai ka ishara kar gaya )   बेवफ़ाई का  इशारा कर गया जिंदगी को बेसहारा कर गया   बन गया हूँ ग़ैर उसकी नजरों में आज राहों में किनारा कर गया   रात दिन आये ख़्वाबों में मेरी ही दिल घायल चेहरा तुम्हारा कर गया   तल्ख़ बातें वो…

  • हाँ खायी जीस्त में ठोकर बहुत है | Sad Shayari

    हाँ खायी जीस्त में ठोकर बहुत है ( Haan khayi jeest mein thokar bahut hai )   हाँ खायी  जीस्त में ठोकर बहुत है जिग़र पे इसलिए  नश्तर बहुत है   मुहब्बत का अपनें ने कब दिया गुल नफ़रत के ही मारे पत्थर बहुत है !   किसी को प्यार क्या  देगे भला वो  मुहब्बत…

  • छोड़ दिया | Chhod Diya

    छोड़ दिया ( Chhod diya )   धीरे धीरे ही मगर छोड़ दिया, तेरी आदत सी पड़ गयी थी मुझे। कब तलक बेजती को सहते हम, खुद से नफरत सी हो गयी थी मुझे। मैनें खुद को भूला दी तेरे लिए, फिर भी मै तुझसा बन ना पाया हूँ, कब तलक कशमकश में रहते हम,…

  • जिंदगी रोज़ ग़म ने ही सतायी ख़ूब है | Ghazal

    जिंदगी रोज़ ग़म ने ही सतायी ख़ूब है ( Zindagi roz gham ne hi satayi khoob hai )   जिंदगी  रोज़  ग़म  ने  ही  सतायी ख़ूब है! हाँ ख़ुशी के ही लिये बस आँखें रोयी ख़ूब है   प्यार के पत्थर मारे है नफ़रत वालों पे मैंनें नफ़रतों  की आज दीवारें गिरायी ख़ूब है  …

  • बहुत समझाया बहुत मनाया | Suneet Sood Grover Shayari

    बहुत समझाया, बहुत मनाया ( Bahot Samjhaya Bahot Manaya )   बहुत समझाया, बहुत मनाया डराया भी ,धमकाया भी वक़्त की नज़ाकत समझो फासलों को नजदीकियां… पर वे तो ऐसे थे एक हुए बगावत के सुर बोल रहे एक एक करते थे जुट हुए धरने पर वो जैसे  बैठे हुए … अशआर कभी कोई नज़्म…

  • कभी अपनों ने ही समझा नहीं है | Udasi Bhari Shayari

    कभी अपनों ने ही समझा नहीं है ( Kabhi apno ne hi samjha nahin hai )   कभी अपनों ने ही समझा नहीं है ! दिल उनसे इसलिए अब मिलता नहीं है   गली में इसलिए छाया अंधेरा कभी तक चाँद वो  निकला नहीं है   मुहब्बत की क्या होती गुफ़्तगू फ़िर कभी वो  पास…

  • कड़ी कड़ी कर जुड़ी जो | Suneet Sood Grover Shayari

    कड़ी कड़ी कर जुड़ी जो ( Kadi kadi kar judi jo )   कड़ी कड़ी कर जुड़ी जो जंजीर ,बेड़ियां हो गईं पांव जख्मी, हाथ रिसते … सोने का पिंजरा सा नशेमन तेरा जज्ब हुई यूं, कि दिल छलनी हुआ तू सय्याद, तेरा इश्क कातिल… सौ आसमां औ’ हवा खुली  दम भरने को अब खोल…

  • रात भर नींद नही आयी मुझे | Neend shayari

    रात भर नींद नही आयी मुझे ( Raat bhar neend nahi aaye mujhe )   रात भर नींद नही आयी मुझे, तेरी यादों ने जगा रखा था। आज फिर से वही तन्हाई है, तेरी यादों ने जगा रखा था।   यादों ने ख्वाब दबा रखा हैं, नींद आती ही नही है मुझको, रातभर करवटों का…

  • प्यार की कब बहार देखी है | Ghazal

    प्यार की कब बहार देखी है ( Pyar ki kab bahar dekhi hai )   प्यार की कब बहार देखी है ! नफ़रतों की  दयार देखी है   आ रही है यहां ग़म की बारिश कब ख़ुशी की फुवार देखी है   जो  आँखें थी भरी नज़ाकत से प्यार  में  बेक़रार  देखी  है   थी…