Chalan mein

चलन में है अब | Chalan mein

चलन में है अब

( Chalan mein hain ab )

 

सीने को खोलने का फैशन चलन में है अब
और गाली बोलने का फैशन चलन में है अब

देखो ज़रा संभल के तुम बात कोई बोलो
कम करके तोलने का फैशन चलन में है अब

ये दूध जैसी रंगत आई नहीं है यूं ही
पाउडर को घोलने का फैशन चलन में है अब

कोने में रो रहें हैं सब सांप बिच्छू अजगर
लोगों से हौलने का फैशन चलन में है अब

अपने हुनर के बूते, बढ़ना हुआ है मुश्किल
पंखे को झोलने का फैशन चलन में है अब

हम सीधे सादे लड़के भाते नहीं किसी को
मक्कार रोलने का फैशन चलन में है अब

तुम आस पास अपने रक्खो नज़र गड़ा के
जेबें टटोलने का फैशन चलन में है अब

जिस पर न चाहा फैसल, तुमने थिरकना बरसों
उस धुन पे डोलने का फैशन चलन में है अब

 

शायर: शाह फ़ैसल मुजफ्फराबादी
सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)

यह भी पढ़ें :-

कैसी बहार पर है वतन | Watan ke Halat par Ghazal

Similar Posts

  • मुहब्बत तू निभाए रख | Muhabbat tu Nibhaye Rakh

    मुहब्बत तू निभाए रख ( Muhabbat tu nibhaye rakh )    गुलों से घर सजाए रख ? वफ़ा अपनी बनाए रख अंधेरों से लगे है डर चिरागो को जलाए रख ज़रा दीदार करने दे नहीं चेहरे छुपाए रख उदासी छोड़ दिल से तू लबों को तू हंसाए रख बढ़ेगा प्यार दिल में और नज़र मुझसे…

  • बहुत बेचैन हूँ | Ghazal Bahut Bechain Hoon

    बहुत बेचैन हूँ ( Bahut Bechain Hoon ) सुकूँ दिल में यहाँ रहता नहीं है? ख़ुशी का जब यहाँ साया नहीं है बहुत बेचैन हूँ उसके लिये मैं अभी तक शहर से लौटा नहीं है उसे मैं कह सकूं कुछ बात दिल की मुझे वो राह में मिलता नहीं है उसे गुल देखकर पचता रहा…

  • पानी पानी हर तरफ़

    पानी पानी हर तरफ़ दिख रहा है आज हमको पानी पानी हर तरफ़कर रहा है ख़ूब बादल मेहरबानी हर तरफ़ बेतकल्लुफ़ होके दोनों मिल न पाये इसलिएबज़्म में बैठे थे मेरे खानदानी हर तरफ़ तोड़कर वो बंदिशें वादा निभाने आ गयाकर रहे थे लोग जब के पासबानी हर तरफ तेरे जैसा दूसरा पाया नहीं हमने…

  • तिश्नगी हमारी | Tishnagi Hamari

    तिश्नगी हमारी ( Tishnagi Hamari ) कुछ तिश्नगी हमारी भी बुझवाइए ज़रा।इक जाम मस्त आंखों से पिलवाइए ज़रा। क्या-क्या शिकायतें हैं पता तो चले हमें।उनको हमारे पास तो बुलवाइए ज़रा। शेअ़रो सुख़न में आपके चर्चे हैं हर तरफ़।कोई ग़ज़ल हमें भी तो सुनवाइए ज़रा। कर देना क़त्ल शौक़ से अरमाने नो-ब-नो।दामन से पहले दाग़ तो…

  • किसको दिल की पीर सुनाएं

    किसको दिल की पीर सुनाएं एक ख़ता की लाख सज़ाएं।किसको दिल की पीर सुनाएं। कोई नहीं इब्न-ए-मरियम सा।ज़ख़्म जिगर के किसको दिखाएं। जान ही जाते हैं जग वाले।राज़-ए-मुह़ब्बत कैसे छुपाएं। नफ़रत के सहरा में आओ।उल्फ़त के कुछ फूल खिलाएं। ख़ाली से बेगार भली है।मुफ़्त न अपना वक़्त गंवाएं। क़रिया-क़रिया पेड़ लगा कर।आबो-हवा को मस्त बनाएं।…

  • दीद-ए-तर | Dida-e-Tar

    दीद-ए-तर ( Dida-e-Tar ) वो मेरे लिए दीद-ए-तर है के नहीं है।उल्फ़त का मिरी उसपे असर है के नहीं है। रस्मन तो उसे आना था फिर भी नहीं आया।उसको मिरे मरने की ख़बर है के नहीं है। तारीकियों इतना तो बता दो कभी मुझको।शाम-ए-ग़मे-हिज्रां की सह़र है के नहीं है। आजाऊंगा,आजाऊंगा इतनी तो ख़बर दो।मेह़फ़िल…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *