Hindi Ishq Shayari

इश्क़ करके गुनाह करते हैं | Hindi Ishq Shayari

इश्क़ करके गुनाह करते हैं

( Ishq karke gunah karte hain ) 

 

जिस्म की जो भी चाह करते हैं
इश्क़ करके गुनाह करते हैं

राब्ते हर किसी के बस में कहां
करने वाले निबाह करते हैं

एक लड़की के प्यार में लड़के
ज़िंदगी क्यों तबाह करते हैं

दर्द समझा है कौन ग़ज़लों में
करने वाले तो वाह करते हैं

हम दिवानों का काम बस ये है
इश्क कहते हैं आह करते हैं

तेरी उल्फत न मिल सकी तो क्या
तेरे ग़म से निकाह करते हैं

जो कभी नाम भी न लेते थे
आज फ़ैसल को शाह करते हैं

 

शायर: शाह फ़ैसल मुजफ्फराबादी
सहारनपुर (उत्तर प्रदेश)
यह भी पढ़ें :-

अच्छा लगा | Acha Laga

Similar Posts

  • मेरे ख़ुलूस को | Mere Khuloos ko

    मेरे ख़ुलूस को मेरे ख़ुलूस को चाहो अगर हवा देनामेरे ख़िलाफ़ कोई वाक्या सुना देना कभी तो आके मेरी ख़्वाहिशें जगा देनावफ़ा शियार हूँ तुम भी मुझे वफ़ा देना तमाम उम्र ये मंज़र रहेगा आँखों मेंनज़र मिलाते ही तेरा ये मुस्कुरा देना जिधर भी देखिए रुसवाइयों के पहरे हैंमेरे ख़ुतूत मेरे साथ ही जला देना…

  • दिखती नहीं | Ghazal Dikhti Nahi

    दिखती नहीं ( Ghazal Dikhti Nahi )   ग़ालिबन उनके महल से झोपड़ी दिखती नहीं I इसलिए उनको शहर की मुफ़लिसी दिखती नहीं II लाज़िमी शिकवे शिकायत, ग़ौर तो फरमा ज़रा I आख़िरश उनकी तुम्हे क्यों बेबसी दिखती नहीं I पेट ख़ाली शख्त जेबें पैरहन पैबंद तर I फिर उसे संसार में कुछ दिलकशी दिखती…

  • लौट आ अब तू कहाँ है | Laut aa Ab

    लौट आ अब तू कहाँ है ( Laut aa ab tu kahan hai )    तू दिखा यूं मत गुमाँ है और भी देखो मकाँ है फूल दूँ कैसे उसे अब वो नहीं अब दरमियाँ है दिल यहाँ लगता नहीं अब वो हुआ जब से निहाँ है उस हसीं से तू मिला दे ये ख़ुदा…

  • जताते नहीं | Jatate Nahi

    जताते नहीं ( Jatate Nahi ) आज कल प्यार क्यों तुम जताते नहींरूठने पर मुझे क्यों मनाते नहीं हारना चाहती हूं मैं सब कुछ मगरप्यार के खेल में तुम हराते नहीं मैं तरसती ही रहती हूं लेकिनकान में चीखकर डराते नहीं मैं हूं तैयार पर आज कल तुम कभीप्रेम से उंगलियों पर नचाते नहीं कौन…

  • मुहब्बत से भर गई | Muhabbat Shayari in Hindi

    मुहब्बत से भर गई ( Muhabbat se bhar gayi )    रंगीनिये -हयात के मंज़र से भर गई बस इक नज़र मिली थी कि दिल में उतर गई प्यासों की प्यास और बढ़ा कर गुज़र गई लेकर सरापा-हुस्न के साग़र जिधर गई उसकी निगाहे-नाज़ बड़ा काम कर गई खाली था दिल का जाम मुहब्बत से…

  • विनय साग़र जायसवाल की ग़ज़लें पार्ट 2

    मुलाक़ात कम नहीं होती अजीब बात है यह रात कम नहीं होतीमेरी निगाह से ज़ुल्मात कम नहीं होती मुझे भी उनसे मुहब्बत है कह नहीं सकतामुहब्बतों पे मगर बात कम नहीं होती वो एक दिन तो मुहब्बत के तीर छोड़ेंगेहमारी उनसे मुलाक़ात कम नहीं होती तेरे हुज़ूर वफाओं का तज़करा क्या होतेरे करम की करामात…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *