Chandan par Chhand

चंदन | Chandan par Chhand

चंदन

( Chandan )

 

प्रभु को अर्पण करें, मस्तक तिलक करें।
चंदन की खुशबू से, जग महकाइये।

रज धुली कण कण, पावन माटी चंदन।
मातृभूमि वीर धरा, मस्तक नवाइये।

चंदन बन महके, खुशियां हो घर द्वार।
प्यार भरे बोल मीठे, तराने सुनाइये।

रंग गुलाल लगाए, चंदन तिलक भाल।
रंगीला त्योहार होली, खुशी से मनाइये।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

घर की इज्जत | Poem Ghar ki Izzat

 

Similar Posts

  • गुरु महिमा गीत | ताटक छंद

    गुरु महिमा गीत गुरु महिमा है अगम अगोचर, ईश्वर शीश झुकाया है। पढ़ा लिखाकर हमको गुरु ने, काबिल आज बनाया है। समय समय अभ्यास कराते, गीत हमको सिखाते जी। सब शिष्यों को पारंगत कर, छंद विधान लिखाते जी। साहित्य सागर में मनवा ये, डुबकी बहुत लगाया है। पढ़ा-लिखाकर हमको गुरु ने, काबिल आज बनाया है।…

  • सुपात्र | Supatra par chhand

    सुपात्र ( Supatra par chhand ) सद्गुणों से भरपूर, कला से हो मशहूर। सुपात्र का हो सम्मान, कदम बढ़ाइए। विनय भाव संस्कार, दूर हो सारे विकार। जग बांटे प्रेम प्यार, उनको बुलाइए। दया धर्म दानशील, शुभ कर्म हो सुशील। गुणी विद्वान मनुज, संग में बिठाइए। कर्मवीर रणधीर, पुरुषार्थी नर वीर। सेवाभावी जान कोई, सम्मान दिलाइए।…

  • शारदे कृपा करो | रामभद्र संवार्णिक दंडक छंद

    शारदे कृपा करो ( Sharde kripa karo ) शारदे! कृपा करो अखंड ज्ञान दान, हूँ अबोध साधिका प्रसाद-दायिनी, l प्रार्थना न जानती न अर्चना निकाम, लेखनी प्रशस्त हो विचार -वाहिनी! l शुद्ध छंद शुद्ध भाव लेखनी प्रबुद्ध, नृत्य गीत वाद्य की प्रचण्ड नादिनी l आपके समक्ष दीन पातकी अशक्त, एक दृष्टि डाल दे विशाल-भावनी!ll ज्ञान…

  • समय रुकता नहीं | Samay rukta nahi | Chhand

    समय रुकता नहीं ( Samay rukta nahi ) मनहरण घनाक्षरी   वक्त निकला जा रहा, समय रुकता नहीं। कालचक्र की गति को, जरा पहचानिए।   शनै शनै बीत रहा, हाथों से निकले रेत। पल पल हर घड़ी, समय को जानिए।   काल की नियति जानो, ठहरता नहीं वक्त। समय को बलवान, जीवन में मानिये।  …

  • जग से निराला लगे,

    जग से निराला लगे रूप घनाक्षरीमनमीत-8,8,8,8चरणांत -21 जग से निराला लगे,सबसे ही प्यारा लगे,छेड़े जब प्रेम धुन,वह राग मनमीत । मुख आभा लगे ऐसी,पूनम के चाॅ॑द जैसी,मुख शोभित लालिमा,ज्यों रजनी चाॅ॑दप्रीत । दीप उजियार करे,घर की है शोभा बढ़े,दमक रहे जुगनू,ऐसे लगे नैन जीत । अजब सी लीला देखो,प्रेम रस जरा चखो,कहे फिर सारा जग,है…

  • जीत | Jeet

    जीत ( Jeet )  मनहरण घनाक्षरी   दिल जितना चाहो तो, दिल में उतर जाओ। मीठे बोल प्यार भरा, गीत कोई गाइए। जग जितना चाहो तो, लड़ना महासमर। शौर्य पराक्रम वीर, कौशल दिखाइए। औरों के हित जो लड़े, समर जीत वो जाते। दीन हीन लाचार को, गले से लगाइए। जीतकर शिखर से, अभिमान ना करना।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *