Darpan par Chhand

दर्पण | Darpan par Chhand

दर्पण

( Darpan )

 

गोरा गोरा गाल गोरी, दर्पण रही निहार।
सांवरी सूरत मोहि, मोहन रिझाइए।

हाथों में ले गगरिया, गांव चली गुजरिया।
दर्पण सा मन मेरा, प्रियतम आइए।

चाल चले मतवाली, चंचल नैनो वाली।
मन में हिलोरें लेती, आईना दिखाइए।

दर्पण दिखा देता है, मन में छिपे भावों को।
फागुन महीना आया, फाग गीत गाइए।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

चिंतन | Chintan par Chhand

 

 

 

Similar Posts

  • सर्वशक्ति कालिका | Sarvashakti Kalika

    सर्वशक्ति कालिका ( चामर छन्द ) 1सर्वशक्ति कालिका कराल रक्त दंतिका।शांभवी सुधा सती सुगम्य चंद्रघंटिका।।चंद्रिका सुबोधिनी गदा त्रिशूल धारिणी।हस्त शंख चक्र ले निशुंभ शुंभ तारिणी।। 2हे अजा सिता अगम्य मातु हे पताकिनी।दुर्गमा त्रिलोचनी विशाल दैत्य नाशिनी।।शारदे सँवार दे अबोध माम् तूलिका।ज्ञान के विहान से प्रकाशवान मूलिका।।(औषधीय जड़ी) 3दुष्ट शत्रु वंश बेल हारिणी कपालिनी।अट्टहास कालिका कुमारि…

  • कर्म ही पूजा है | Chhand karm hi pooja hai

    कर्म ही पूजा है ( Karm hi pooja hai ) मनहरण घनाक्षरी   कर्म श्रद्धा कर्म भक्ति कर्म धर्म पुनीत है कर्म ही पूजा हरि की कर्म नित्य कीजिए   कर्म योग कर्म ज्ञान कर्म पथ पावन है कर्म कर जीवन की नौका पार कीजिए   कर्म सेवा हरि आस्था कर्मशील पुरुषार्थी कर्म से मंजिलें…

  • चुगली रस | Chhand in Hindi

    चुगली रस ( Chugli Ras ) मनहरण घनाक्षरी   चुगलखोर कान में, भरते रहते बात। चुगली रस का सदा, रसपान वो करें।   कैकई कान की कच्ची, मंथरा की मानी बात। चौदह वर्ष राम को, वनवास जो करें।   चिकनी चुपड़ी बातें, मीठी मीठी बोलकर। कानाफूसी पारंगत, चुगलियां वो करें।   चुगली निंदा जो करे,…

  • लड्डू | Laddoo par Chhand

    लड्डू ( Laddoo ) मनहरण घनाक्षरी   गोल मटोल मधुर, मीठे मीठे खाओ लड्डू। गणपति भोग लगा, मोदक भी दीजिए।।   गोंद मोतीचूर के हो, तिल अजवाइन के। मेथी के लड्डू खाकर, पीड़ा दूर कीजिए।।   खुशी के लड्डू मधुर, खूब बांटो भरपूर। खुशियों का चार गुना, मधु रस पीजिए।।   शादी समारोह कोई, पर्व…

  • मोह | Moh chhand

    मोह ( Moh ) मनहरण घनाक्षरी   मोह माया के जाल में, फंस जाता रे इंसान। लोभ मोह तज जरा, जीवन संवारिये।   कोई पुत्र मोह करें, कोई दौलत का लोभ। लालच के अंधे बने, पट्टिका उतारिए।   ना बांधो मोहपाश में, करना है शुभ काज। सद्भावों के फूल खिला, चमन खिलाइए।   ना काया…

  • शालीनता | देव घनाक्षरी | Chhand Shalinta

    शालीनता ( Shalinta )   शालीनता सुशीलता सौम्य स्वभाव बनाए संस्कार हमारे शुभ हो कीर्ति पताका गगन   विनय धीरज धर भाव विमल धार लो उर आनंद बरसे हरसे मन का चमन   बहती पावन गंगा प्रेम सिंधु ले हिलोरे सत्कार मिले सबको, कर जोड़ करें नमन   सुंदर सी सोच रख विनम्र हो भाव…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *