Chhand kalratri

कालरात्रि | Chhand kalratri

कालरात्रि

( Kalratri )

मनहरण घनाक्षरी

 

काली महाकाली दुर्गा,
भद्रकाली हे भैरवी।
चामुंडा चंडी रुद्राणी,
कृपा मात कीजिए।

 

प्रेत पिशाच भूतों का,
करती विनाश माता।
सिद्धिदात्री जगदंबे,
ज्ञान शक्ति दीजिए।

 

अग्नि ज्वाला से निकले,
भयानक रूप सोहे।
खड्ग खप्पर हाथ ले,
शत्रु नाश कीजिए।

 

रूद्र रूप कालरात्रि,
पापियों का नाश करें।
खुशियों से झोली भर,
शरण में लीजिए।

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

कमरे की घुटन | Kavita kamare ki ghutan

Similar Posts

  • चंद्रयान की सफलता | Chandrayaan ki Safalta

    चंद्रयान की सफलता ( Chandrayaan ki safalta )   दुर्लभ को सम्भव किया, भारत देश महान।। चन्द्रयान की सफलता, जय जय जय विज्ञान।। जय जय जय विज्ञान, निराली तेरी माया। भारत अनुसंधान, जगत में अव्वल छाया। कहैं शेष कविराय, जियें वैज्ञानिक वल्लभ। कुशल प्रशासन नीति, मिथक तोड़े सब दुर्लभ।।   लेखक: शेषमणि शर्मा”इलाहाबादी” प्रा०वि०-नक्कूपुर, वि०खं०-छानबे, जनपद…

  • दान और दक्षिणा | Chhand daan aur dakshina

    दान और दक्षिणा ( Daan aur dakshina )   मनहरण घनाक्षरी     दान दीजिए पात्र को, दक्षिणा विप्र जो होय। रक्तदान महादान, जीवन बचाइए।   पात्र सुपात्र को देख, दान जरूर कीजिए। अन्नदान सर्वोत्तम, भोजन खिलाइए।   अनुष्ठान करे कोई, जप तप पूजा-पाठ। ब्राह्मण भोजन करा, दक्षिणा दिलाइए।   तुलादान छायादान, कर सको कन्यादान।…

  • डाकिया | Chhand dakiya

    डाकिया ( Dakiya ) मनहरण घनाक्षरी   सुख-दुख के संदेश, खुशियों के प्यार भरे। डाकिया का इंतजार, होता घर द्वार था।   आखर आखर मोती, चिट्ठी की महक लाता। इक छोटा पोस्टकार्ड, कागज में प्यार था।   चूड़ियों की खनक भी, बुलंदी की ललक भी। खुशियों का खजाना वो, डाक लाता जब था।   वो…

  • करवा चौथ | Chhand karva chauth

    करवा चौथ ( Karva chauth )   सुहागनें नारी सारी, करवा चौथ मनायें। कर सोलह श्रंगार, गौरी चांद मना रही। मनमीत प्रियतम, प्राण प्यारे भरतार। लंबी जीए उम्र जग, मंगल कामना कहीं। दिलों का पावन रिश्ता, टूटे ना तकरार से। प्रीत का झरना बहे, प्रेम की सरिता बही। धवल चांदनी सुधा, उमड़ा सागर प्रेम। पिया…

  • अतिक्रांत छंद – विषममात्रिक

    जय गणेश जय गणेश गणपति दाता, तुम्हीं हो मेरे अपने,कर जोड़े द्वारे ठाढ़ी, कर दों पूरे सपने l हो प्रसन्न जग के स्वामी, फलित कर्मों में जलती ,मैं पापी लम्पट लोभी, अगणित करती गलती l अज्ञानी पर हूँ बालक, लगा चरणों से अपने ,अंजानी राहें चल कर, लागे माला जपने l प्रभु ज्ञानी अंतरयामी, प्रणामी…

  • स्कंदमाता | माहिया छंद

    स्कंदमाता ( Skandmata )   स्कंदमाता कल्याणी पर्वत निवासिनी रक्षा करें दुर्गा मां   गूंजता दरबार मां जयकार हो रही जले अखंड ज्योत मां   यश वैभवदात्री दो वरदान भवानी सुनो महागौरी मां   जय माता जगदंबे मां शेरावाली आओ दानव दलनी   दुर्गा माता रानी कमल नयन वाली मां जगत की करतार   तुम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *