Chhand sukoon ki zindagi

सुकून की जिंदगी | Chhand sukoon ki zindagi

सुकून की जिंदगी

( Sukoon ki zindagi )

मनहरण घनाक्षरी

 

दो घड़ी पल सुहाने,
सुकून से जीना जरा।
गमों का भी दौरा आये,
हंस हंस पीजिए।

 

सुख से जियो जिंदगी,
चैन आए जीवन में।
राहत भरी सांस ले,
खूब मजा लीजिए।

 

भागदौड़ सब छोड़,
होठों से मुस्कुराइये।
सुकून की सांस मिले,
जियो जीने दीजिए।

 

प्रीत भरे मोती बांटो,
आपस में मिल यार।
नेह दुलार सबको,
प्यार थोड़ा कीजिए।

 ?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

बेखबर जिंदगी | Kavita bekhabar zindagi

 

Similar Posts

  • हाथी घोड़ा और पालकी | Krishna Bhajan

    हाथी घोड़ा और पालकी ( Haathi ghoda aur palki )    हाथी घोड़ा और पालकी, जय बोलो कंहैयालाल की। केशव माधव गोपाल की, गोकुल लाला नंदलाल की। भक्तों के प्रतिपाल की, वृंदावन बिहारी लाल की। मां यशोदा के लाल की, बाल कृष्ण गोपाल की। जय द्वारका नाथ की, मेरे प्यारे दीनानाथ की। जय बोलो हरि…

  • सवालों के घेरे में | Sawalo ke Ghere Mein

    सवालों के घेरे में ( Sawalo ke ghere mein ) जहां तक संभव हो आपसी संबंधों के बीच में आप निर्णायक ना बने आज नहीं तो कल हल हो ही जाएगी उनकी समस्याएं किंतु आप आ सकते हैं सवालों के घेरे नीयत किसी की भी साफ नहीं माहौल हावी है सभी पर कोई कहीं से…

  • मैं हैरान हूं | Main Hairan Hoon

    मैं हैरान हूं ( Main Hairan Hoon ) मैं हैरान हूं, आखिर क्यों लोग? मौत का जिम्मेदार, बाबा को नहीं मान रहे , क्यों लोग मात्र , सेवादार और आयोजकों को, दोषी ठहरा रहे हैं। आखिर कौन सा डर , बाबा को दोषी मानने से , रोक रहा है । कहीं बाबा श्राप न देदे…

  • पर्यावरण || Kavita

    पर्यावरण ( Paryaavaran )   नीम की डाली ने चिड़िया से कहा आ जाओ। रोकर चिड़िया ने कहा मेरा पर्यावरण लाओ।। धुआ ये धूल और विष भरी गैसों का ब्योम, कैसे पवित्र होगा हमको भी तो समझाओ।। काट कर पेड़ हरे अभिमान से रहने वालों, छांव के लिए सिर धुनकर नहीं अब पछताओ।। कारखानों का…

  • ढाई अक्षर | Dhai akshar

    ढाई अक्षर ( Dhai akshar )   रातभर फिर सोचकर घबराये हम। ढाई अक्षर भी नहीं पढ़ पाये हम।।   मेरी आंखों में तुम्हारे आंसू थे, चाह करके भी नहीं रो पाये हम।।   एक पग भी तुम न आगे आ सके, सारे बंधन तोड़कर के आये हम।।   तमस तेरे मन से कब जायेगा…

  • महात्मा गांधी | Gandhi jayanti kavita

    महात्मा गांधी ( Mahatma Gandhi : Gandhi jayanti kavita ) ( 2 )  गौरों की ताकत बांधी,गांधी के रुप में आंधी थी।बड़े दिल वाले फकीर थे,वो पत्थर की अमिट लकीर थे। पहनते थे वो धोती खादी,रखते थे इरादे फौलादी।उच्च विचार और जीवन सादा,उनको प्रिय थे सबसे ज्यादा। संघर्ष अगर तो हिंसा क्यों,खून का प्यासा इंसा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *