दलबदल

दलबदल | व्यंग्य रचना

दलबदल

( Dalbadal )

शर्म कहां की,
कैसी शराफत,
सिध्दांत सभी,
अपने बदल !
मिलेगी सत्ता,
समय के साथ चल!
दे तलाक़,
इस पक्ष को,
उसमें चल !
हो रही है,
सत्ता के गलियारे,
उथल-पुथल!
तू भी अपना,
मन बना,
वर्ना पछताएगा कल!
सब करते हैं,
तू भी कर!
चिंता कैसी,
किसका डर?
पंजा नहीं,ना सही,
यह ले कमल!

Jameel Ansari

जमील अंसारी
हिन्दी, मराठी, उर्दू कवि
हास्य व्यंग्य शिल्पी
कामठी, नागपुर

यह भी पढ़ें :-

भड़ास | व्यंग्य रचना

Similar Posts

  • मां बाप से मुंह मोड़ लिया | Maa Baap se

    मां बाप से मुंह मोड़ लिया ( Maa baap se munh mod liya )   लाठी के सहारो ने, बुढ़ी आंखों के नयनतारों ने। घर के राजकुमारों ने, बेघर बना कर छोड़ दिया। कैसा घोर कलयुग आया, स्वार्थ का यह दौर छाया। सबसे प्यारी हुई माया, मां बाप से मुंह मोड़ लिया। लूटपाट का चलन…

  • श्रीमती उमेश नाग की कविताएं

    सुनो है‌! मेरी राधा रानी, सुनो है‌! मेरी राधा रानी,तुम बिन मेरा नही कोई साथी।मौसम चाहे कैसा भी हो,सभी प्राकृतिक समय कामैं ही कर्ताधर्ता।सावन भादो न ही सही,अभी पोष माह का जोर-सहना होगा।हम तुम मिलकर समस्त,जग वासीयों का शिशिर सेबचाव करना होगा।सभी प्राणी चर अचर, मानवएवं प्रकृति का रक्षण करना होगा।मैं ही जगतपिता हूं,सर्व ब्रम्हांड…

  • कोरोना का सीजन | Kavita

    कोरोना का सीजन ( Corona ka season )   कोरोना का सीजन कोरोना का सीजन बढ़े रोग दिन दिन घटे ऑक्सीजन कोरोना का सीजन…….2 मार्च में आए अप्रैल में छाए पूरी मई यह तबाही मचाए जून में जाने की करे डिसीजन करोना का सीजन……. जुलाई में जोर भयो कमजोर अगस्त में गश्त बची अब थोर…

  • मकर संक्रांति | Makar Sankranti

    मकर संक्रांति ( Makar Sankranti ) ( 2 )  मकर संक्रांति का है पर्व महान, है यह समर्पित सूर्य भगवान। कहें लोहड़ी, खिचड़ी उत्तर में, पूर्व बिहू,दकन पोंगल से जान।। पौराणिक सुने एक कथा महान, श्रीहर्ष आते, करते कुम्भ स्नान। अपना संचित सब धन औ धान्य, सब याचकों को कर जाते दान।। हम भी ब्रह्म…

  • कथा रिटायरमेंट की

    कथा रिटायरमेंट की ( हास्य ) .लाली जी कर घोषणा, हुई रिटायर आज।सब सुन लो खुद ही करो, अपना अपना काज।।मैं न करूँ अब काम कुछ, मलो हाथ अरु पैर।मेरे काम सभी करो, तभी मनेगी खैर।।लालू चौके में गए, पुलक पकाई खीर।छौंका राई-हींग से, लाली भईं अधीर।।लल्ला ने सोचा करें, मम्मा को इम्प्रैस।सिंथेटिक साड़ी बिछा,…

  • रोशनी के दिये | Kavita Roshni ke Diye

    रोशनी के दिये ( Roshni ke Diye ) देखा है मैंने ऐसे गुरुओं को भी जो अपने घरों में अंधेरा करके दूसरे घरों में रोशनी फैला देते है और बदले में उन्हें मिलता है – तिरस्कार। सिर्फ साल के एक दिन उन्हें सम्मान में शाल श्रीफल से नवाज दिया जाता है बाकी के तीन सौ…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *