कंचन काया | Geet Kanchan Kaya

कंचन काया

( Kanchan Kaya )

संयम के आधारों से अब ,फूटे मदरिम फव्वारे हैं
कंचन काया पर राम क़सम, यह नैना भी कजरारे हैं

तेरे नयनों में मचल रही, मेरे जीवन की अभिलाषा
कुछ और निकट आ जाओ तो,बदले सपनों की परिभाषा
है तप्त बदन हैं तृषित अधर,कबसे है यह तन मन प्यासा ।।
तुम प्रेमनगर आ कर देखो ,महके-महके गलियारे हैं ।।
कंचन काया—–

बरसा दो प्रेम सलिल आकर ,इस जलते नंदन कानन में
अंतस स्वर अब तक प्यासे हैं ,मेघों से छाये सावन में
कितना उत्पात मचाती हैं ,तेरी छवियाँ उर-आँगन में
तुम राग प्रणय का गाओ तो ,हँसते-खिलते उजियारे हैं ।।
कंचन काया —–

तुम साँझ-सवेरे दर्पण में ,अपना श्रंगार निहारोगी
मेरे सपनो के आँगन में, यौवन के कलश उतारोगी
कब प्रणय-निमंत्रण आवेदन ,इन नयनों के स्वीकारोगी
आखिर तुमको भी पता चले ,हम कब से हुए तुम्हारे हैं ।।
कंचन काया —-

आँचल में सुरभित गन्ध लिये,बहती है चंचल मस्त पवन
सच कहता हूँ खिल जायेगा, तेरे उर का हर एक सुमन
पंछी सा इत उत डोलेंगे ,झूमेंगे धरती और गगन
अपने स्वागत में ही तत्पर ,जगमग यह चाँद-सितारे हैं ।।
कंचन काया——

मानो मन के हर कोने में ,तेरी आहट ही रहती हो
सुर-सरिता बन कर तुम निशिदिन ,अंतस-सागर को भरती हो
शुचि स्वप्नों का भण्डार लिये, मेरे ही लिये संवरती हो
रेशम कुंतल बिखराओ तुम ,व्याकुल कितने अँधियारे हैं ।।
कंचन काया —-

संयम के आधारों से अब ,फूटे मदरिम फव्वारे हैं ।
कंचन काया पर राम क़सम, यह नैना भी कजरारे हैं ।।

Vinay

कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003

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One response to “कंचन काया | Geet Kanchan Kaya”

  1. Ajay Nidaan world record holder(saahitya) Avatar
    Ajay Nidaan world record holder(saahitya)

    बहुत ही सार्थक लेखन का अदभुत परिचय दिया है आपने सारगर्भित और जीवंत एहसास को दर्शाती हुई रचना आपकी

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