Dard Ke Daur Mein

दर्द के दौर में | Dard Ke Daur Mein

दर्द के दौर में 

( Dard Ke Daur Mein )

मौत थीं सामने ज़िन्दगी चुप रही
दर्द के दौर मैं हर खुशी चुप रही

जिसकी आँखों ने लूटा मेरे चैन को
बंद आँखें वही मुखबिरी चुप रही

दीन ईमान वो बेच खाते रहे
जिनके आगे मेरी बोलती चुप रही

बोलियां जो बहुत बोलते थे यहाँ
उन पे कोयल की जादूगरी चुप रही

वो जो मरकर जियें या वो जीकर मरें
देखकर यह बुरी त्रासदी चुप रही ।।

बाढ़ में ढ़ह गये गाँव घर और पुल ।
और टेबल पे फ़ाइल पड़ी चुप रही ।।

देखकर ख़ार को हम भी खामोश थे ।
जो मिली थी प्रखर वो खुशी चुप रही ।।

Mahendra Singh Prakhar

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

महेन्द्र सिंह प्रखर के मुक्तक | Mahendra Singh Prakhar ke Muktak

Similar Posts

  • बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँ

    बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँ बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँतेरी आँखों में सागर देखती हूँ हुई मा’दूम है इंसानियत अबहर इक इंसान पत्थर देखती हूँ पता वुसअत न गहराई है जिसकीवो सहरा दिल के अंदर देखती हूँ हुनर ज़िंदा रहेगा है ये तस्कींमैं हर बच्चे में आज़र देखती हूँ न ग़ालिब और कोई…

  • “जैदि” की ग़ज़ले | Zaidi ki Ghazlein

    अजनबी मुसाफिर थे तन्हा राहों में प्यासी जमीं को, जीवन मिल गया, बूंद गिरी पानी की बदन खिल गया। ==================== अजनबी मुसाफिर थे तन्हा राहों में, चंद मुलाकात में कोई ले दिल गया। ==================== मुझको हाल ए दिल की ख़बर न थी, न जाने कैसे पैदा कर मुश्किल गया। ===================== सब कुछ लुटा देख मैं…

  • उनसे उम्मीद कैसी | Unse Umeed Kaisi

    उनसे उम्मीद कैसी ( Unse Umeed Kaisi ) उनसे उम्मीद कैसी वफ़ा की जनाब।बात है जिनके लब पर दग़ा की जनाब। यार नाख़ुश हैं अग़यार भी हैं ख़फ़ा।कौन सी हम ने ऐसी ख़ता की जनाब। ठीक हो कर वही दिल दुखाने लगे।रात-दिन जिनकी हमने दवा की जनाब। जिसके शैदाई हैं एक मुद्दत से हम।यह है…

  • जाने क्यों इतराते हैं लोग…?

    जाने क्यों इतराते हैं लोग…? खुद को समझदार समझकर जाने क्यों इतराते हैं लोग,प्रश्नों के जाल में आकर खुद ब खुद फँस जाते हैं लोग। सच की परछाई से डरकर नज़रें क्यों चुराते हैं लोग,झूठ के सहारे दुनिया में मेले क्यों सजाते हैं लोग। रिश्तों की सौदागरी में दिल का वज़न भुला बैठे,फ़ायदे की ख़ातिर…

  • छोड़ो ना | Chhodo Na

    छोड़ो ना ( Chhodo na )   साल नया तो झगड़ा अपना यार पुराना छोड़ो ना मिलना जुलना अच्छा है तुम बात बनाना छोड़ो ना। भूल गए जो रूठ गए जो नज़रें फेरे बैठे हैं यादों में घुट घुट कर उनकी अश्क़ बहाना छोड़ो ना। दरिया, सहरा, सागर ,बादल ,कैद किया सब जुल्फ़ों में औरों…

  • अपनी आँखों में आसूँ खुशी के

    अपनी आँखों में आसूँ खुशी के अपनी आँखों में आसूँ खुशी केस्वप्न सच हो गये ज़िन्दगी के उनके आते ही आयीं बहारेंलौट आये हैं दिन आशिकी के कुछ तो मजबूरियां होगीं उनकीपास जाते न यूँ वो किसी के बात क्या है जो तू डर रहा हैतूने देखे हैं दिन बेबसी के जिन बहारों का मौसम…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *