दरिद्रता | Daridrata

दरिद्रता

( Daridrata )

 

सुबह सबेरे
तड़तड़ाहट की आवाज
कानों में पड़ते ही
नीद टूटी,मैं जाग पड़ा,
देखा कि
लोग सूप
पीट पीट कर
दरिद्र” भगा रहे थे
घर के कोने-कोने से
आंगन बाग बगीचे से,
मैं समझ न पाया
दरिद्र कहां है?
कौन है?
भागा या नहीं!
दरिद्र मनुष्य खुद
अपने कर्म से
अपने सोंच से
होता है या हो जाता है
यह कैसी विडम्बना है
हम जान कर अंजान है
और कहते हैं
हम महान है
बलवान हैं
संज्ञान और
बुद्धिमान हैं
जबकि,
अपने इन्हीं
कर्मो से ही हम
परेशान हैं ,
मैं समझ चुका था
सदियों से
अंधविश्वास,
और रूढ़ियों के
बोझ को ढो ढो कर
लगता है बस
यही हमारे दुखों का
एक निदान है,
इसीलिए तो
सूप पीट पीट कर
दरिद्र भगाने के बाद भी
दरिद्रता ही
आज हमारी
पहचान है।

रचनाकार रामबृक्ष बहादुरपुरी

( अम्बेडकरनगर )

यह भी पढ़ें :-

मिलता वही सब आपको | Milta Wahi

Similar Posts

  • मकर संक्रांति पर्व | Makar Sankranti Parv

    मकर संक्रांति पर्व ( Makar sankranti parv ) उड़ी उड़ी रे पतंग देखो उड़ी रे पतंग, मन हुआ है मतंग देख कर ये पतंग। कभी इधर चली तो कभी उधर मुड़ी, आसमान में चहुं ओर ये पतंग उड़ी। नीले पीले हरे गुलाबी सब रंगों में रंगे, जैसे आसमान में इंद्रधनुष आज हैं टंगे। पतंग उड़ाकर…

  • मंजूर के दोहे | Manzoor ke dohe

    मंजूर के दोहे **** 1. शूल समान तू तेज हो, भेदो हरेक बाधा पहुंचोगे तुम शीर्ष पर, लक्ष्य कठिन नहिं ज्यादा 2. पथिक तू चलते चला जा, लक्ष्य दूर न ज्यादा आशा भाव मन मा लिए, हर लोगे तुम बाधा 3. धरा हमारी उर्वरा, फसलन की नहिं सोच लाओ बीज कंद मूल के, उगालो मिट्टी…

  • छत्तीसगढ़िया किसान | Chhattisgarhia Kisan

    छत्तीसगढ़िया किसान ( Chhattisgarhia kisan )   छत्तीसगढ़िया बेटा हरव मे छत्तीसगढ़ मोर महतारी, धरती दाई के सेवा करथव किसानी मोर रोजगारी। धन्हा खेत अऊ अरई तुतारी मोर हावय चिन्हारी, नागर बईला अऊ खेत खार मोर हावय संगवारी। माटी ले सोना उपजाथव भईया मे हा खेतिहर किसान, मे गहूं उपजाथव तब सबला मिलते रोटी बर…

  • अर्थ हीन | Arth-Heen

    अर्थ हीन ( Arth-Heen )    एक स्त्री के लिए अच्छा घर,अच्छा पति अच्छे बच्चे, सास ससुर और ,एक अच्छी खासी आमदनी भी तब,किसी काम की नही होती जब, उस पर लगा हो बंदिशों का पहरा किसी से भी बात न करने की मनाही उठती हुई शक की नजरों के साथ हर बात पर व्यंग…

  • सौंदर्य | Saundarya Kavita

    सौंदर्य ( Saundarya )   सौन्दर्य समाहित ना होता, तेरा मेरे अब छंदों में। छलके गागर के जल जैसा, ये रूप तेरा छंदों से। कितना भी बांध लूं गजलों मे,कुछ अंश छूट जाता है, मैं लिखू कहानी यौवन पे, तू पूर्ण नही छंदों में।   रस रंग मालती पुष्प लता,जिसका सुगंध मनमोहिनी सा। कचनार कली…

  • कुल्हड़ | Kulhar

    कुल्हड़ प्यारे कुल्हड़ बनते प्यारी मिट्टी सेतिलक करते सब प्यारी मिट्टी सेकुम्हार बनाए प्यारे होते कुल्हड़जब देखें सब मन भाए कुल्हड़ चाय के कुल्हड़ सबको होते प्यारेयार दोस्त सब मिलकर पीते सारेकुल्हड़ की चाय सबको होती प्यारीखुश होकर चाय पीएं जनता सारी कुल्हड़ शुद्धता के सदा ही होते प्रतीकबनाएं कुम्हार कुल्हड़ मिट्टी करके बारीककुल्हड़ सबके…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *