Milta Wahi

मिलता वही सब आपको | Milta Wahi

मिलता वही सब आपको 

( Milta wahi sab aapko )

 

लोक  जन   कल्याण  हेतु

लिख   रहे   जो  काव्य  हैं,

पीढ़ियों   को  सीख  देकर

दे    रहे    जो    ताप    है,

रह  गया  वंचित  अगर जो

आज   के   इस   बात   से

उसके लिए जीवन सदा ही

जीवन  नहीं  अभिशाप  है।

  क्या    कहूं    कैसे   कहूं

  भावी  युवा  जज़्बात  को,

  नापते   हैं  हर  किसी  के

   हैंसियत   औकात     को,

   सोंचते     जो    है    नही

  जैसी करनी तस खेल को

   छींटते  जो   बीज  भू में

       मिलता वही सब आप को।

शिक्षित हुए किस बात का

किस बात का अभिमान है

मां बाप को तू छोड़ कर

कैसा बना हैवान है

दुनिया जगत संसार में

है खोजता जिस देव को

मां बाप के ही रूप में

वह सामने भगवान है।

दौलत सभी जो थे रखे

मां बाप अपने पास में

आज तेरा हो गया अब

उनके लिए न खास है,

वक्त भी आयेगा एक दिन

खुद समझ जाएगा तूं

भागता पीछे है जिसके

छोड़ कर मां बाप है।

स्वर्ग न दिखता कहीं भी

न दिखे सब देव ही,

सामने जो देव अपने

धिक्कारते सदैव ही,

ले पकड़ जो अंगुलियां

चलना सिखाया है हमें

पूज ले यह देवता

फिर मिले या ना मिले।

वक्त का बदलाव है

बच्चा बड़ा अब हो गया

खलता सदा यह बात कि

बच्चा बदल सा अब गया,

सामान सा न बांट इनको

ये तेरे भगवान हैं

रख सजा मंदिर में मन के

यदि बात मन को भा गया।

 

रचनाकार रामबृक्ष बहादुरपुरी

( अम्बेडकरनगर )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/shaam-lagbhag-nau-baje/

Similar Posts

  • मिलन की चाह | Chhand milan ki chah

    मिलन की चाह ( Milan ki chah )   मनमीत आओ मेरे, मिलन की घड़ी आई। चाहत की शुभवेला, दौड़े चले आइए।   मौसम सुहाना आया, रूत ने ली अंगड़ाई। मिलन को प्रियतम, प्रेम गीत गाइए।   खुशबू ने डाला डेरा, महका दिल हमारा। लबों पे तराने प्यारे, मधुर सुनाइए।   दिल में उमंगे छाई,…

  • अडिग | Adig

    अडिग ( Adig )    किसको कहे हम खास अपना किस पर जतायें हम विश्वास अपना हर किसी दिल में फरेब है पल रहा किस पर लगाएं हम आश अपना तोड़े हैं वही जिन्हें जोड़ा था हमने छोड़े हैं वही जिन्हें संभाला था हमने बहाये थे आंसू हमने जिनके खातिर वे हि कहते हैं ,उन्हें…

  • doha dashak | -दोहा दशक | Hindi Poetry On Life | Hindi Poetry

    दोहा दशक ( Doha Dashak )     किया वतन की शान से, जिसने भी खिलवाड़। मिले दंड कठोर उसे, जाये जेल तिहाड़।   कृषक जनों की भीड़ में, शामिल कुछ शैतान। कभी नहीं वो चाहते, बढ़े वतन की शान।   डायन प्रथा के विरुद्ध, लड़कर हुई महान। छुटनी देवी को मिला, पद्मश्री ससम्मान।।  …

  • एकता का प्रतीक

    एकता का प्रतीक एकता का प्रतीक मकर संक्रान्तिजिन्हें जानकर दूर होगी भ्रांतिसभी जाति ,संप्रदाय, पंथ वालोंमिलकर रहो बनी रहेगी शांति । तिल है कालाचावल है उजलाशक्कर है गेरूआमूंग है हरासभी है एक रस में घुला । चावल , दाल मसाले मिलकरसबने एक खिचड़ी बनाईयह पर्व मानव को सौंपकरऋषि, मनि एक बात सिखाई । भले हमारा…

  • शीतला माता | Poem sheetla mata

    शीतला माता ( Sheetla Mata )   शीतलता दात्री शीतला, शीतल करे हरे सब पीरा। जा पर कृपा करें माँ भवानी सहाय करे रघुवीरा।   गर्दभ हो विराजित माता, कलश मर्जनी कर सोहे। ठंडा बासी आपको भाता, श्वेतांबर माता मन मोहे।   चेचक रोग नाशिनी मैया, पीत ज्वर हर संताप हरे। आरोग्य  सुखदाता  माता,  हर्ष …

  • विचारों का है प्रकटीकरण | Poem vicharo ka hai prakatikaran

    विचारों का है प्रकटीकरण ( Vicharo ka hai prakatikaran )   श्राद्ध पक्ष पूर्वजों को समर्पण पुरखों को कर दो तर्पण कुआं ताल पर जल अर्पण उड़द चावल से, आमंत्रण कुशा पैती किया धारण काले तिल मंत्र है उच्चारण दे रहे उन्हें है निमंत्रण अग्रजो का करें अनुकरण पूर्वजों का यह है स्मरण विश्वास लिए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *