दया धर्म का मूल है

दया धर्म का मूल है | Kavita

दया धर्म का मूल है

( Daya dharm ka mool hai )

 

 

दया भाव जीवो पर रखे दया धर्म का मूल है
दीन दुखी निर्धन सताना मानव भारी भूल है

 

दया करें उन लाचारों पर रोगी और बीमारों पर
जहां बरसा कहर टूटकर हालातों के मारो पर

 

आओ जरा संभाले उनको पीड़ा से निकालें उनको
जिनका सबकुछ लुट चुका बांध सब्र का टूट चुका

 

जनसेवा को हाथ बढ़ाना मानवता का उसूल है
संकट समय साथ निभाना दया धर्म का मूल है

 

अपनापन अनमोल सलोना स्नेह सुधारस धारा
प्यार के मोती लुटा जग में बांटें मधुर प्रेम प्यारा

 

जहां दया और मानवता सुख की गंगा बहती है
आठों पहर अमृत बरसे सदा भवानी रहती है

 

जीव जगत से प्रेम निभाए संकट मिटे समूल है
बेजुबान सब दया के पात्र दया धर्म का मूल है

 

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

पुरानी तस्वीर | Purani tasveer kavita

Similar Posts

  • शर्मनाक स्थिति | Kavita

    शर्मनाक स्थिति ( Sharmanak sthiti )   ऐसे पिट रहा है साहेब का विदेशों का डंका, आग लगा के रख दी स्वयं की लंका। शवों पर चढ़ शान से सवारी करते रहे, आॅक्सीजन के अभाव में भले हम दम तोड़ते रहे। बिछ गई लाशें चहुंओर, पर थमा ना चुनाव और नारों का शोर। अब मद्रास…

  • अपराध बोध | Apradh Bodh

    अपराध बोध ( Apradh bodh )   अपनी आत्मा पर कोई बोझ न कभी रखना | किसी का दिल तुम्हारी वजह से दु:खे, ऐसा कोई काम न कभी करना | कोई इंसान पत्थर दिल न होता यहाँ | इस बात से इंकार न कभी करना | मंजू की लेखनी का है यही कहना | बहुत…

  • दर्द | Dard

    दर्द ( Dard )   दर्द छलक ही पड़ता है जब गहराइयाँ छू लेती हैं आकाश खामोश जबान भी बोल उठती है फिर मिले अंधेरा या प्रकाश परिधि में ही घूमती जिंदगी तोड़ देती है बांध सहनशीलता की समझ नहीं पाता वही जब रहती है उम्मीद जिस पर आस्था की लग सकते हैं अगर शब्द…

  • हिंदी हमारी मातृभाषा | Kavita Hindi hamari matrabhasha

    हिंदी हमारी मातृभाषा  ( Hindi hamari matrabhasha )   ये हिंदी हमारी ऐसी मातृ-भाषा, सरल शब्द में इसकी परिभाषा। विश्व में सारे गौरवान्वित करती, ३३ व्यंजनों से बनी राज भाषा।। हिन्द की भाषा का करो बखान, जिससे गूंजें ये सारा ही जहान। करो गुणगान और बनो विद्वान, हिन्द की हिंदी गूंजें सारे जहान।। हिंदी भाषा…

  • भारत के त्यौहार | Bharat ke Tyohar

    भारत के त्यौहार ( Bharat ke tyohar ) मेरा भारत देश महान, जिसमे आते त्योहार तमाम । रौनक, खुशियाँ और धूम-धाम, उत्सव से सजी कितनी शाम।   दीवाली में दीप हैं जलते, होली में रंग हैं उड़ते। ईद पर सब सिवइयां खाते, क्रिसमस पर हम पेड़ सजाते।   हर त्यौहार में है कुछ ख़ास लाते…

  • जटायु राज | Kavita

    जटायु राज ( Jatayu raj )   रावण मारीच को संग ले पंचवटी में जाता है मायावी बाबाजी बनकर सीता हर के लाता है   कोई प्राण बचा लो मेरे मेरी करूण पुकार सुनो आकर रक्षा करो हमारी धरा गगन जहान सुनो   स्वर सुन सीता माता का पक्षी राज जटायु आया रे दुष्ट क्या…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *