Kavita waqt

वक़्त | Kavita waqt

वक़्त

( Waqt )

 

जब से छाया गुनाहों की पड़ने लगी ।
रूह मेरी ही मुझसे झगड़ने लगी ।।

 

तेज आंधी से जंगल जब हिलने लगे ।
सूखे पेड़ों की दम तब उखड़ने लगी ।।

 

मन के बीरान जंगल डराने लगे ।
गर्म बालू सी तबीयत बिगड़ने लगी ।।

 

वक़्त के लम्हें ओलों से गिरने लगे ।
जिंदगी की हरेक सांस झड़ने लगी ।।

 

मरते दम तक भी जब बच्चे आये नहीं ।
लाश तक बाप की तब अकड़ने लगी ।।

 

 

✍?

 

लेखक : : डॉ.कौशल किशोर श्रीवास्तव

171 नोनिया करबल, छिन्दवाड़ा (म.प्र.)

यह भी पढ़ें : –

उदासी | Udasi par Kavita

Similar Posts

  • हिन्दी | Poem on Hindi

    हिन्दी ( Hindi )   हिन्दी के सम्मान मे मित्रो ,लिख लो कह लो आज । एक वर्ष के बाद पुनः फिर, होगी इस पर बात ॥ ** बडे`बडे सम्मेलन होगे, ढोल मंझीरे साथ । बडे-बडे बैनर पर होगा,हिन्दी दिवस है आज॥ ** बोली जाती बहुत ही बोली,भारत के सम्मान मे । पर हिन्दी को…

  • पौधा संरक्षण है जरूरी

    पौधा संरक्षण है जरूरी ****** आओ मिलकर ठान लें पौधों की न जान लें महत्त्व उसकी पहचान लें अपना साथी मान लें वायु प्राण का है दाता फल फूल बीज दे जाता जीवन भर प्राणी उसे है खाता आश्रय भी है पाता फिर भी उसकी रक्षा करने से है कतराता जिस दिन नष्ट हो जाएगा…

  • भिखारी | Hindi Poem on Bhikhari

    भिखारी ( Bhikhari )    फटे पुराने कपड़ों में मारे मारे फिरते हैं भिखारी, इस गांव से उस गांव तक इस शहर से उस शहर तक न जाने कहां कहां ? फिरते हैं भिखारी । अपनी भूख मिटाने/गृहस्थी चलाने को न जाने क्या क्या करते हैं भिखारी? हम दो चार पैसे दे- अनमने ढंग से…

  • साहसी राष्ट्रपति मार्सेलो | Poem in Hindi on president Marcelo

    साहसी राष्ट्रपति मार्सेलो   पुर्तगाली राष्ट्रपति के साहस ने दुनिया को चौंकाया है, डूब रहीं दो लड़कियों को अपनी जान पर खेलकर बचाया है। 71 वर्षीय राष्ट्रपति बुजुर्ग हैं, उनकी हिम्मत और साहस देख आज दुनिया कर रही उनकी कद्र है । सहसा मुझे भी वीर कुंवर सिंह की याद आ गई, 1857 के स्वतंत्रता…

  • बातें | Baten kavita

    बातें ( Baten )   छुपा के रखेंगे सारी बातें । काट वे देंगे हमारी बातें ।। बात तो बात है दबंगों की । चुप्पी साधेंगी बेचारी बातें ।। गले मिलकर हमारे दोस्त सदा । करेंगे  हमसे  दुधारी  बातें ।। हमें अच्छे बुरे से क्या मतलब । हम  तो  बोलेंगे करारी बातें ।। परिंदे   कांपते …

  • पूर्ण विराम अंत नहीं | Kavita Purn Viram

    पूर्ण विराम अंत नहीं ( Purn Viram Ant Nahi )   पूर्ण विराम अंत नहीं, नए वाक्य की शुरुआत है सकारात्मक सोच प्रशस्त, नवल धवल अनुपम पथ । असफलता अधिगम बिंदु, आरूढ़ उत्साह उमंग रथ । आलोचनाएं नित प्रेरणास्पद, श्रम साधना उत्तर धात है । पूर्ण विराम अंत नहीं, नए वाक्य की शुरुआत है ।।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *