Deedar karen kaise

दीदार करें कैसे | Deedar Karen Kaise

दीदार करें कैसे

( Deedar karen kaise )

दीदार करें कैसे, दिलदार बता देना
चाहत की जो रस्में हैं, हमको भी सिखा देना

कानून से बढ़कर तो, होता ही नहीं कोई
गर की है ख़ता मैंने, मुझको भी सज़ा देना

हालात बहुत बिगडे़, जीना भी हुआ मुश्किल
हैं संग बने इंसा, जीने की दुआ देना

जागीर मुहब्बत की, मिलती नहीं है सबको
लेकिन तू मुहब्बत का, उल्फ़त ही सिला देना

ढ़ाती है सितम हम पर, ये ज़िंदगी बन दुश्मन
है ज़ख्मी ज़िगर मेरा, कोई तो दवा देना

बस्ती हैं जलाते जो, जां लेते हैं जनता की
अब ऐसी सियासत को, मत और हवा देना

सच्चाई की राहों पर, चलती ही रही मीना
भटकूँ न कहीं मौला, तू राह दिखा देना

Meena Bhatta

कवियत्री: मीना भट्ट सि‌द्धार्थ

( जबलपुर )

यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • हर पहर तन्हा | Har Pahar Tanha

    हर पहर तन्हा ( Har Pahar Tanha ) उनकी फ़ुर्क़त में हर पहर तन्हा।दिल ये रोता है किस क़दर तन्हा। एक दूजे की राह तकते हैं।हम इधर और वो उधर तन्हा। उनकी अदना सी एक चाहत पर।ज़ीस्त कर दी गयी बसर तन्हा। हम भी कमरे में क़ैद रहते हैं।वो भी करते हैं अब गुज़र तन्हा।…

  • काशाना मंज़ूर हुआ

    काशाना मंज़ूर हुआ तेरे दिल का अब हमको हर काशाना मंज़ूर हुआतेरी ज़ुल्फ़ों के साये में मर जाना मंज़ूर हुआ उठने लगीं हैं काली घटायें छलके हैं जाम-ओ-साग़रऐसे आलम में तुझको भी बलखाना मंज़ूर हुआ महकी महकी गुलमेंहदी है चाँद सितारे भी रौशनऐसे मौसम में उनको भी तरसाना मंज़ूर हुआ लहराते हैं ज़ुल्फें हमदम हर…

  • कोई अपना यार नहीं | Koi Apna Yaar Nahin

    कोई अपना यार नहीं ( Koi apna yaar nahin )   कोई अपना यार नहीं तन्हा हूँ दिलदार नहीं हूँ सच्चा में भरा वफ़ा कोई मैं अय्यार नहीं देखें है वो रोज़ मुझे उल्फ़त की इज़हार नहीं फ़ैले कैसे उल्फ़त फ़िर फ़ूल भरा गुलज़ार नहीं जानें वो गुम कहाँ हुआ उसका हो दीदार नहीं देता…

  • उंगलियां उठा देंगे | ग़ज़ल दो क़ाफ़ियों में

    उंगलियां उठा देंगे ( Ungliyan Utha Denge ) ज़मीने-दिल पे तो हम कहकशां भी ला देंगे तमाम लोग यहाँ उंगलियां उठा देंगै कहीं नमक तो कहीं मिर्चियां मिला देंगे दिलों में लोग यूँ हीं दूरियां बढ़ा देंगे ज़माना हमको भी मुजरिम क़रार दे देगा किसी से ऐसी कोई दास्तां लिखा देंगे किसी को सच की…

  • बहू निकली है पुखराज | Ghazal Bahu

    बहू निकली है पुखराज ( Bahu Nikli Hai Pukhraj ) बज उठ्ठेगी घर -घर में फिर सबके ही शहनाई उधड़े रिश्तों की कर लें गर हम मिलकर तुरपाई जीत लिया है मन सबका उसने अपनी बातों से मेरे बेटे की दुल्हन इस घर में जब से आई घर में बहू की मर्ज़ी के बिन पत्ता…

  • मंदिर मस्जिद | Poem on Mandir Masjid

    मंदिर मस्जिद ( Mandir Masjid )   करना क्या है ? मंदिर मस्जिद और खाना है ! मंदिर मस्जिद भर रक्खी है नफ़रत दिल में कर रक्खा है मंदिर मस्जिद खूब लड़े हैं भाई भाई मुद्दा क्या है ? मंदिर मस्जिद आपका बेटा पढ़ा लिखा है क्या करता है ? मंदिर मस्जिद ख्वाहिश जो पूछो…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *