देख तो सही | Dekh to Sahi

देख तो सही

( Dekh to Sahi )

कोई भी रह न जाए कसर देख तो सही
चल छोड़ बात चीत मगर देख तो सही

रख कर मुझे वो ढूँढ रहा है यहाँ वहाँ
चिल्ला रहा हूँ कब से इधर देख तो सही

नाज़ुक सी शै पे बार-ए-क़यामत है किसलिए
यारब तरस खा सू-ए-कमर देख तो सही

हैरत-ज़दा न हो कि दिल मजबूत हो गया
पौधे से बन रहा है शजर देख तो सही

उल्फ़त है ये यहाँ तो मुसीबत हज़ार हैं
फिर भी ज़रा नदी का सफ़र देख तो सही

बरबाद होते देखना है खुद को अब असद
ओ दिल-फ़रेब शोख़-नज़र देख तो सही

असद अकबराबादी 

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