Mehfil -E- Ishq

महफ़िल-ए-इश्क | Mehfil -E- Ishq

महफ़िल -ए- इश्क

( Mehfil-e-Ishq )

 

महफिले इश्क में इसरार की मोहलत नहीं होती।
जहां में यार से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती।।

वफ़ा के आब से ही जिंदगी में चैन मिलता है,
अना के शजर पे ताउम्र की चाहत नहीं होती।।

मरीजे इश्क मर भी जाय तो मतलब कहां उनको,
ज़माने की अदाओं से जिसे फुर्सत नहीं होती।।

किसी ने कान में क्या कह दिया आंसू निकल आये,
यही इक कैद है जिससे कभी राहत नहीं होती।।

शहंशाही झुका करती रही है इश्क के बाबत,
दिल के बाजार में असबाब की कीमत नहीं होती।।

जला करता मुसलसल शेष चाहे लाख तूफा हों,
चरागे इश्क़ में ख़ुदग़र्ज़ की आदत नहीं होती।।

 

लेखक: शेषमणि शर्मा”इलाहाबादी”
प्रा०वि०-नक्कूपुर, वि०खं०-छानबे, जनपद
मीरजापुर ( उत्तर प्रदेश )

यह भी पढ़ें :-

मैं अकेला थोड़ी हूँ | Main Akela

Similar Posts

  • मेरे हिस्से आया दर्द | Zindagi Dard bhari Shayari

    मेरे हिस्से आया दर्द ( Mere hisse aaya dard )    जीवन में जब पाया दर्द तब औरों का समझा दर्द याद मुझे आये कुछ दोस्त दिल में फिर से जागा दर्द साथ इसे भाये दिल का कब रहता है तन्हा दर्द उसके हिस्से में खुशियाँ मेरे हिस्से आया दर्द हिज्र लगा ऐसा दिल पर…

  • अपनी तकदीर | Apni Taqdeer

    अपनी तकदीर ( Apni Taqdeer ) अपनी तकदीर में जुदाई थीयार की हो रही विदाई थी आग चाहत की जो लगाई थीहमने अश्क़ो से फिर बुझाई थी हाथ हाथों में फिर आकर छूटाकैसी तेरी खुदा लिखाई थी क्यूँ करूँ याद उस सितम गर कोप्यार में जिसके बेवफाई थी एक वो ही पसंद था मुझकोअब जो…

  • पहली दफ़ा | Pehli Dafa

    पहली दफ़ा ( Pehli Dafa )   जबसे तुम्हें देखा है जीने की हसरत हुई है, पहली दफ़ा ख़ुद से हमको मोहब्बत हुई है, सुन ज़रा तू ऐ मेरे हमराज़ ऐ मेरे हम-नशीं, तेरे आने से मुर्दा-ए-दिल में हरकत हुई है, तू पास है दिलमें जश्न-ए-बहारां हर रोज़ है, तेरे बिन तो फ़क़त ख़िजाँ की…

  • पर तू बदल गया | Par tu Badal Gaya

    पर तू बदल गया ( Par tu Badal Gaya ) मौसम विसाले यार का फिर से निकल गयामैं तो वहीं खड़ी रही पर तू बदल गया मिसरे मेरे वही रहे मौज़ूं फिसल गयामेरी ग़ज़ल पे तेरा ही जादू जो चल गया ममनून हूँ सनम मैं करूँ शायरी नईनज़रों पे मेरी तीर मुहब्बत का चल गया…

  • मैं दिल से ख़ूबसूरत हूँ | Khoobsurat Shayari

    मैं दिल से ख़ूबसूरत हूँ ( Main dil se khoobsurat hoon )   मैं अपने आप में जो आज इक ज़मानत हूँ किसी की नेक इनायत की ही बदौलत हूँ जो मुझको छोड़ गया था मेरे भरोसे पर मैं आज तक ही उसी शख़्स की अमानत हूँ ज़माना शौक से पढ़ने लगा है यूँ मुझको…

  • वो निशानी दे गया | Wo Nishani de Gaya

    वो निशानी दे गया ( Wo Nishani de Gaya ) ज़र्द चेहरा वो निशानी दे गयाबे सबब सी ज़िन्दगानी दे गया उम्र भर जिसको समझ पाए न हमइतनी मुश्किल वो कहानी दे गया खूँ चका मंज़र था हर इक सू मगरकोई लम्हा शादमानी दे गया जाते जाते वो हमें यादों के साथखुश्बुएं भी जाफ़रानी दे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *