Desh prem ki kavita

सौगंध मुझे है इस मिट्टी की | Desh prem ki kavita

सौगंध मुझे है इस मिट्टी की

( Saugandh mujhe hai is mitti ki )

 

 

सौगन्ध मुझे है इस मिट्टी-की कुछ ऐसा कर जाऊॅंगा,

अपनें वतन की सुरक्षा में दुश्मनों को धूल-चटाऊॅंगा,

नक्सली हों चाहें घुसपैठी इन सबको मार गिराऊॅंगा।

ऑंधी आऍं चाहें तूफ़ान आऍं मैं चलता ही जाऊॅंगा।।

 

साहस और ज़ुनून के बल शिखर चूमकर दिखाऊॅंगा,

ख्वाहिशें ना अधूरी रखूॅंगा उन्हें पूरी करता जाऊॅंगा

दुश्मन को ख़ाक में मिलाकर ऐसे पहचान बनाऊॅंगा।

हर तरह की विपत्तियों से मुकाबला करता जाऊॅंगा।।

 

धरती-माॅं का तिलक लगाकर शत्रु से लड़नें जाऊॅंगा,

असफल का कोई काॅलम नहीं जीतकर दिखाऊॅंगा।

एक-एक बूंद ख़ून की बहाकर तिरंगा में फहराऊॅंगा‌,

वक्त मिला तो शहीद सैनानियों का क़र्ज़ चुकाऊॅंगा।।

 

देना पड़ा तो वतन के खातिर जान अपनी लुटा दूॅंगा,

लेकिन दुश्मनों को मॅंसूबे में कामयाब ना होने दूॅंगा।

कर दूॅंगा सब के सिर कलम लाशें उनकी बिछा दूॅंगा,

दागे चाहें बम्ब-ग्रेनेट मैं भी जलवा उन्हें दिखा दूॅंगा।।

 

इस बहादुरी का में भी अब पर्याय बनके दिखाऊॅंगा,

घुस जाऊॅंगा चक्रव्यूह में चाहें लौटकर ना आऊॅंगा।

कविता कहानी मुक्तक दोहे इन पर लिखते जाऊॅंगा,

देशभक्ति व शहादत की ख़ुशबू विश्व में फैलाऊॅंगा।।

 

 

 

 

रचनाकार :गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

Similar Posts

  • मासूमियत | Masoomiyat par Kavita

    मासूमियत ( Masoomiyat )    मासूम सी वो भोली भाली सूरत वो अल्हड़पन इठलाता सा निश्चल निर्भीक मासूमियत चेहरा कोई अनजाना सा दुनिया के आडंबर से दूर अपने आप में मशगूल बेखबर जहां के दुष्चक्रो से खिलता सा प्यारा फूल मधुर सी मिठास घोलता प्यार भरे मृदु वचन बोलता मासूमियत भरी नैनों में लगा बचपन…

  • एक अनजाना फरिश्ता | Rajendra kumar pandey poetry

    एक अनजाना फरिश्ता ( Ek anjan farishta )     जिंदगी के किसी मोड़ में जब खुद को तराशने जी जरूरत हुई अनजाने राहों में अचानक ही एक अजनबी से मुलाकात हुई     वो अपनापन का पहला एहसास आज फिर महसूस हुई और वो अजनबी अपना जाना पहचाना जरूरत बन गई     कभी…

  • फूल | Phool kavita

     फूल ( Phool kavita )   –> ये फूलों का संसार, ये फूलों का संसार || 1.फूलों का संसार बेहद रंगीन, सुंदर सुगंधित रहता है | फूलों के साथ जीना सीखो, हर फूल कुछ तो कहता है | लाल-गुलाबी-सफेद-जामुनी, कुछ सतरंगी होते हैं | कुछ तो होते बड़े सुनहरे, कुछ छोटे-छोटे होते हैं | –>…

  • कहां हो मेरे पुरखों | Kahan ho Mere Purakhon

    कहां हो मेरे पुरखों ( Kahan ho mere purakhon )    मैं आऊंगा नहीं कभी भी लौटकर यह ध्यान रखना, चला गया हूं ध्यान रखना सदा के लिए तुम्हें छोड़कर। याद आ रही है आपकी हर वक्त हर पल, भूले से भी नहीं भूल पा रहे साथ रहकर। याद आ रहा है हमेशा परछाईं की…

  • अहसास कवि का | Ahsaas Kavi ka

    अहसास कवि का ( Ahsaas kavi ka )    जब खिले फूल खुशबू को महकाते है हाल भंवरो का जो मंडराते है हर चमन मे उढे जब ये सैलाब सा अपने भावों को हम भी लिख जाते है वार अक्सर जो दिल पर कर जाते है भान उनको भी कुछ हम करवाते है जो करती…

  • उपहार | Uphar

    उपहार आता नववर्षसब होते मिलकर हर्षदेते उपहार प्यारा नववर्षघर आंगन देते दर्षमिलता उपहार अपने जीवनजीवन में बने श्रीमनउपहार संग नववर्ष वेलानववर्ष पर लगता मेलाईश्वर उपहार उपहार प्यारामिलता जब उसे प्याराखुशियों संग चहुंओर खुशीमिलती हैं जब ताजपोशीअनमोल उपहार सुनील कुमारनकुड़ सहारनपुरउत्तर प्रदेश भारत यह भी पढ़ें :-

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *