धरातल | Dharatal

धरातल

( Dharatal )

 

समय के सामूहिक धरातल पर
आपकी व्यक्तिगत चाहत
बहुत कीमती नही होती…

बात जब
परिवार,समाज,देश की हो
शिक्षा,संस्कृति,संस्कार की हो
सभ्यता,स्वभाव,व्यवहार की हो…

आपका उत्तरदायित्व
आप तक ही सिमट नही सकता
जरूरतें,जरूरत पर ही पूरी नही होती
कर्म और सहयोग भी जरूरी है…

गलत ठहराने से ही आप
सही नही हो जाते
कीमत योगदान की होती है
महज विरोध की ही नही…

मुखिया हो या सरकार
जिम्मेदारी मे आपका साथ जरूरी है
बहकावे मे भटक जाने से
संचालन सही नही होता…

परिणाम मे न केवल आप
बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी
आपकी लापरवाही का
भुगतान करती है
लाभ इसका अन्य ही उठाते हैं,….

 

मोहन तिवारी

 ( मुंबई )

यह भी पढ़ें :-

गलत कौन | Galat Kaun

Similar Posts

  • मीठी-मीठी ठण्डक | Kavita

    मीठी-मीठी ठण्डक ( Meethi meethi thandhak )   कांप रहे सब हाथ पांव, मौसम मस्त रजाई का। देसी घी के खाओ लड्डू, मत सोचो भरपाई का।   ठिठुर रहे हैं लोग यहां, बर्फीली ठंडी हवाओं से। धुंध कोहरा ओस आई, अब ठंड बढ़ गई गांवों में   गजक तिल घेवर बिकती, फीणी की भीनी महक।…

  • हॉकी का कांस्य पदक | Kavita Hockey Kansya Padak

    हॉकी का कांस्य पदक ( Hockey Kansya Padak ) भारत के शेरों ने फिर परचम लहराया है। पेरिस में हॉकी का कांस्य पदक आया है। जुनून,जज़्बे ने दिलों को जीत लिया मधुर। गर्व से भारतवासियों का सिर ऊंचा उठाया है। हॉकी के मैदान में तिरंगा शान से फहराया है। हर चुनौती को वीरों ने वीरता…

  • वो काले बादल | Wo Kale Badal

    वो काले बादल ( Wo Kale Badal ) वो काले बादल वो गीली मिट्टी वो बरसती बूंदे वो लहराते आंचल वो थिरकते पैर वो भीगी आजादी वो खुशहाल चहरे वो मिठे गीत वो काले बादल वो गीली मिट्टी वो बरसती मोहब्बत वो बिखरी जुलफे वो शरारती बाते वो लहराते आंचल नाज़ अंसारी यह भी पढ़ें:-…

  • हुंकार | Hunkar kavita

    हुंकार ( Hunkar )   मातृभूमि  से ब ढ़कर कोई, बात नही होती हैं। हम हिन्दू हैं हिन्दू की कोई, जाति नही होती हैं।   संगम तट पर ढूंढ के देखो, छठ पूजा के घाटों पे, हर हिन्दू में राम मिलेगे,चाहे चौखट या चौबारो पे।   गंगा  गाय  राम  तुलसी  बिन, बात  नही होती है।…

  • अधर | Muktak adhar

    अधर ( Muktak adhar  ) ( मात्रा भार 16-16 )   अधरों पर जब मुरली बाजे मोर मुकुट पीतांबर साजे राधा कृष्ण प्रेम दीवानी घट घट वासी हृदय बिराजे   अधरों पर मुस्कान ले आती कविता मंचों पर छा जाती भाव भरी बहती गंगा है साहित्य सरिता सबको भाती     कवि : रमाकांत सोनी नवलगढ़ जिला…

  • हमारा कश्मीर | Kashmir kavita

     हमारा कश्मीर  ( Hamara kasmir )   –> हमारे कश्मीर की धरती , रानी भारत देश की || 1.वो कश्मीर की यादें, वो सुनहरी वादियाँ | हो रही हों जैसे, बर्फीले पर्वतों की शादियाँ | वो ऊँचे लंबे सीधे-साधे , ब्रक्ष हरे देवदार है | बर्फ से लदे पत्ते, मानो कश्मीर मे त्योहार है |…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *