Kavita par kavita
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कविता

( Kavita )

 

युगो युगो से कविता महकी सदियों अलख जगाई
दिलों तक दस्तक दे जाती शब्द सुधा रस बरसाई

 

भावों की बहती सरिता काव्यधारा बन बह जाती
जनजागरण जोत जला उजियारा जग में फैलाती

 

प्रेम की पावन गंगा सी सद्भावों की अविरल धारा
देशप्रेम जन मन जगाती हरती मन का अंधियारा

 

कवि मंचो की शान बने गूंजती बुलंद आवाज में
सत्ता को संभाले रखती प्रखर होकर हर राज में

 

शब्दों के मोती चुन चुन काव्य प्रभा हो दमकती
वाणी का उद्गार कविता कवि अधरों पर चमकती

 

गीतों के तराने उमड़े दोहा मुक्तक मोती बरसे
छंद सोरठा चौपाई के बोल सुनकर हृदय हरसे

 

काव्य की गंगा सुहानी सी बहती पावन रसधार
जन मन भीगे प्रेम में हो कविता की मधुर फुहार

 

ओज भरी हुंकार बनती कभी प्रीत तराने गाती है
हंसी खुशी की फुलझड़ियों से रंग नए बरसाती है

 

शब्द सुमन से समां महके खुशबू जग फैलाती है
लेखनी की मशाल जलाकर राष्ट्रप्रेम जगाती है

 

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कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

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