Dil ka bahakna

दिल का बहकना | Dil ka bahakna | Chhand

दिल का बहकना

( Dil ka bahakna )

 

मनहरण घनाक्षरी

 

दिलकश हो नजारे,
कोई हमको पुकारे।
लगे स्वर्ग से सुंदर,
महकती वादियां।

 

दिल दीवाना हो जाए,
दिल कहीं पे खो जाए।
प्रीत के तराने गाये,
मन भाये शादियां।

 

झूम उठे तार सारे,
बोल मीठे प्यारे प्यारे।
दिल की धड़कनों में,
बज उठे घंटियां।

 

रूप कोई मन मोहे,
चितवन चित सोहे।
दिल बहक ही जाए,
बड़ी-बड़ी हस्तियां।

?

कवि : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :- 

दिल की महफिल सजाए बैठे हैं | Dil ki mehfil sajaye baithe hain

Similar Posts

  • श्याम बसे घट घट | Shyam Base Ghat Ghat

    श्याम बसे घट घट ( Shyam base ghat ghat )    हरिहरण घनाक्षरी   रामजी बसा लो घट, श्याम बसे घट घट। पणिहारी पनघट, भर लाई नीर घट। भोर भई निशा घट, प्रेम रहा उर घट। राम बसे जब घट, पाप सारा जाए घट। सर तीर भर घट, छलकत अध घट। जला दीप घट घट,…

  • जय हिंद जय भारत | लावणी छन्द

    जय हिंद जय भारत इस माँ से जब दूर हुआ तो , धरती माँ के निकट गया । भारत माँ के आँचल से तब , लाल हमारा लिपट गया ।। सरहद पर लड़ते-लड़ते जब , थक कर देखो चूर हुआ । तब जाकर माँ की गोदी में , सोने को मजबूर हुआ ।। मत कहो…

  • चहक चिट्ठी की | Chithi par Chhand

    चहक चिट्ठी की ( Chahak chithi ki ) मनहरण घनाक्षरी   जब भी डाकिया आता, पत्रों का पिटारा लाता। चिट्ठियों का इंतजार, बेसब्री से करते हैं।   भावन उर उमंगे, जगे चहक चिट्ठी की। गांव को परदेस में, यादें दिल में रखते।   चिट्ठी सेतु बन गई, जुड़े दिल के तार। सुख-दुख के संदेश, पीड़ा…

  • भगत सिंह परघनाक्षरी

    भगत सिंह पर घनाक्षरी भरी तरुणाई मे वो, देश की लड़ाई मे वो,फाँसी के फंदे मे झूले, पुण्यात्मा महान हैं। वीर वो कहाते हैं जो, जां देश पे लुटाते हैं,ऐसे ही प्यारे भगत, सिंह वो महान हैं। भारत की शान हैं वो, हमारी आन वान हैं,गाता गुणगान सारा, भारत महान है। हैं शहीद वो कहाते,…

  • भीषण गर्मी | रोला छन्द

    भीषण गर्मी कहती है सरकार , आज है भीषण गर्मी । पर भाषण में आज , नही है कोई नर्मी ।। हो विद्यालय बंद , हुए हैं बच्चे मूर्छित । खबर यही हो फ्रंट , सभी के मन हो हर्षित ।। हम भी हैं इंसान , करें हम सब मजदूरी । लू की लगे लपेट…

  • समांं महका दो आज | Chhand

    समांं महका दो आज (  मनहरण घनाक्षरी छंद )   गीतों का सजाओ साज समां महका दो आज झड़ी बरसाओ ऐसी धूम होनी चाहिए   खूब गाओ छंद गीत मुक्त कंठ नव गीत रस बरसे प्रेम का भाव होना चाहिए   शौर्य पर लिखो गीत योद्धा जंग जाए जीत हिम्मत हौसला मिले ओज होना चाहिए…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *