दिल मचलने लगा है 
दिल मचलने लगा है 

दिल मचलने लगा है 

 

 

दिल मचलने लगा है एक मुखड़ा देखकर

भूल गया हूँ उसको अपनें घर का  रास्ता देखकर

 

किस  तरह उससे मिलूं मैं उसके घर जाकर भला

घर उसके तो रह गया हूँ  दंग पहरा देखकर

 

बात कोई वो मेरी सुनता नहीं है प्यार से

दिल हुआ मेरा दुखी उसका ये  नखरा देखकर

 

सच नहीं  उसकी ज़बां पे एक भी तो शब्द का

हूँ दुखी मैं उसका ये झूठा तमाशा देखकर

 

प्यार का  दिल में नहीं उसके रहा अल्फ़ाज़ है

भर आया दिल बोलना यूं तल्ख़ उसका देखकर

 

गांव में मसरूफ़ हूँ मैं काम इतना  रात दिन

शहर तेरे आऊंगा मिलनें को  मौक़ा देखकर

 

इसलिए आज़म इशारा प्यार का करता नहीं

उसकी आंखों में फ़रेबी यार धोखा देखकर

 

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शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

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