राम हे राम मेरे राम राम हे राम मेरे राम तुम आओ म्हारे घर में मेरे भाग खुल जाए तुम आओ म्हारे दिल में मेरा जीवन सफल हो जाए राम हे राम मेरे राम मैं डुबा हूं इस जीवन में मुझे तो तारो राम औरों को तारा मुझे भी निकालो मेरे राम राम हे राम…
ईंट की दीवारें ( Eent ki Deewaren ) जब तक है जीवन जगत में वक्त का दौर तो चलता रहेगा बंटी है रात और दिन में जिंदगी ये चक्र तो यूँ ही चलता रहेगा मिलेंगे रेत के टीले हर जगह कहीं पर्वतों का झुंड होगा होगी कहीं कहीं खाईं गहरी कहीं खौलता कुआं होगा कट…
नशा ( Nasha ) नशा मुक्ति दिवस पर एक कविता अच्छों अच्छों को नशा कितना बिगाड़ देता हैl बसी बसाई गृहस्ती को मिनटों में उजाड़ देता हैl बच्चे का निवाला छीन बोतल में उड़ा देता हैl दूरव्यसन के आदि को हिंसक बना देता हैl बिकने लगता है मकान सड़क पर ला देता हैl आदि…
दुख के राह हजार हैं दुख के राह हजार हैं सुख की कोई राह नहीं क्यों अन्तर में पलता है विकट वेदना चाह नहीं। कुमुद निशा में लेटी है चंचलता बस खेती है सारे द्रुम विश्वास टिके हैं मन में क्यों वैराग्य नहीं। दूर दृष्टि में छोड़ गये हैं बन्धन सारे तोड़ गये हैं कितना…
भाग्य ( Bhagya ) भाग्य निखर जाये हमारा जब तकदीरे मुस्काती। ग्रह आकर साथ देते, खुशियों की घड़ी आती। सेवा स्नेह संस्कार हृदय में विनय भाव पलता है। सद्भावो की धारा में, पुष्प भाग्य खिलता है। पुष्प भाग्य खिलता है किस्मत के तारे चमकते, सुखों का लगता अंबार। अनुराग दिलों में पलता, जीवन में…
पद्मजा ( Padmaja ) पद्मजा श्री चरणों में, स्वर्णिम प्रज्ञा भोर घट पट नवल धवल, मृदुल मधुर विचार प्रवाह । स्नेहिल व्यवहार तरंगिनी, सकारात्मकता ओज अथाह । स्वच्छ स्वस्थ अंतर काय, कदम चाल मंगलता ओर । पद्मजा श्री चरणों में, स्वर्णिम प्रज्ञा भोर ।। जीवन पथ प्रति क्षण , अनुभूत अनंत अनुराग । दिग्दर्शन…