Dr. Bhimrao Ambedkar par Kavita

डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर | Dr. Bhimrao Ambedkar par Kavita

डॉक्टर बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर

( Dr. Baba Saheb Bhimrao Ambedkar )

 

देश विदेश में बुद्धजीवियों के मध्य
बाबा साहेब ने धाक जमाया था
देश विदेश के विश्व विद्यालयों से
सबसे सर्वोच्च बहुत डिग्री पाकर
शिक्षा के क्षेत्र में प्रसिद्धि पाया था
भारत में जारी छुआछूत,असमानता को
दूर भगाया था
दलितों,पिछड़ों, गरीब सवर्णों और अल्पसंख्यकों का जननायक होने का
महान गौरव पाया था
भारत का संविधान रच कर
सभी वर्ग की महिलाओं ,आदमियों को
अधिकार दिलाया था
महात्मा गांधी आस्तिक थे
डॉक्टर अंबेडकर नास्तिक थे
महात्मा गांधी जातिवादी व्यवस्था के समर्थक थे
भीमराव अम्बेडकर जातिवादी व्यवस्था का संपूर्ण विनाश चाहते थे
वैज्ञानिक सोच से भरपूर थे
अंधविश्वास के विनाशक थे
कमजोर वर्गो में यही सोच
घर घर तक फैलाया था
अफसोस! कुछ पढे लिखे लोग
बाबा साहेब के विचारों को धता बताते हैं
अंधविश्वास के जाल में
लोगों को फंसाते हैं
पीढ़ी दर पीढ़ी गुलामी की
जंजीरों में जकड़ते जाते है
बाबा साहेब डा.अंबेडकर कहते थे
अंतर्जातीय विवाह करो
उसका असर समाज में दिखता है
फिर भी कुछ लोगों के मन में
यह विचार शूल की तरह चुभता है
कुछ पढे लिखे दलित व अन्य वर्ग के लोग
संसार की चकाचौंध में खो जाते है
अपनों को ही अपने पास से
दूर भागते हैं
फिर भी सच्चे अंबेडकरवादी
बने घूमते हैं

 

© रूपनारायण सोनकर
प्रख्यात साहित्यकार/सूअरदान के लेखक

यह भी पढ़ें :-

गौतम बुद्ध | Gautam Buddha

 

Similar Posts

  • युवाओं को समर्पित | Yuvaon ko Samarpit

    युवाओं को समर्पित  ( Yuvaon ko samarpit  )   हे युवाओं,देश बचाओ हम करते तुम्हारा आव्हान तुम ही भविष्य भारत का हो तुमसे ही अब देश की पहिचान ।। मन के उपवन में हे युवाओं, कुछ ऐसे उपजाओ विचार मन कर्म भूमि में रम जाए चैतन्य रथ पर होके सवार ।। भारत मां के लाल…

  • गांव री गुवाड़ आओ | राजस्थानी कविता

    गांव री गुवाड़ आओ ( राजस्थानी कविता )   गांव री गुवाड़ आओ, खेत हरसावै है। ठंडी ठंडी पून बहारां, गांव बुलावै है। काकड़ी मतीरा खाल्यो, चालो म्हारा खेत म। मीठी मीठी बातां करस्यां, ठंडी बालू रेत म। चौपालां अर पगडंडी, गीत सुरीला गावै है। गांव री महक माटी री, थानै गांव बुलावै है। हरया…

  • कर्मठ बनिए | Kavita Karmath Baniye

    कर्मठ बनिए ( Karmath Baniye ) निरन्तर लगाव का भाव रखना , हद और सरहद जमीन की होती है ।।1। भारतीय अंधेरे भी हैं मुट्ठी बांधे , हाथापाई की झड़प चीन की होती है ।।2। शब्द के प्रयोग से प्रभाव शून्य होता, सम्मान सदैव मनहर मौन की होती है।।3। हर युद्ध का पथप्रदर्शक धर्म रहा…

  • चाहत | Poem chaahat

    चाहत ( Chaahat )   हम हैं तेरे चाहने वाले, मन के भोले भाले। रखते है बस प्रेम हृदय में, प्रेम ही चाहने वाले।   माँगे ना अधिकार कोई,ना माँगे धन और दौलत। प्रेम के संग सम्मान चाहने, वाले हम मतवाले।   हम राधा के विरह गीत है, हम मीरा के भजनों में। हम शबरी…

  • तमन्नाएं | Tamannayen

    तमन्नाएं ( Tamannayen )  निकला था आकाश को छू लेने की ख्वाहिश मे तमन्ना थी सितारों के साथ बादलों संग खेलूं चांद की धरती पर सूरज से बाते करूं पर, अचानक ही धरती डोल गई,और मैं गिरा गहरी खाई मे बहुत देर बाद समझा की मैं हनुमान नही था ऐसे ही ठंड की कंपकंपाती रातों…

  • कलयुगी दोहे | Rastogi ke dohe

    कलयुगी दोहे ( Kalyugi dohe )    झूठ बराबर तप नही,सांच बराबर पाप। जाके हृदय झूठ है,ताके हृदय है आप।।   रिश्वत लेना धर्म है,सच बोलना है पाप। दोनो को अपनाइए,मिट जाएंगे संताप।।   माखन ऐसा लगाईये, बॉस खुश हो जाए। बिना काम के ही,प्रमोशन जल्दी हो जाए।।   गंगा नहाए से पाप धुले,मै सागर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *