डॉ. कामिनी व्यास रावल की ग़ज़लें | Dr. Kamini Vyas Poetry
किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई
किशन बाँसुरी तूने जब भी बजाई
तिरी राधिका भी चली दौड़ी आई
नहीं और कुछ देखने की तमन्ना
तुम्हारी जो मूरत है मन में समाई
हुई राधिका सी मैं भी बाबरी अब
कथा भागवत माँ ने जब से सुनाई
रहे भक्त तेरी शरण में सदा जो
भंवर से उसी की है नैया बचाई
किया नाश तुमने अधर्मी का जग में
सदा सत्य की राह सबको दिखाई
दिया कर्म का ज्ञान सारे जगत को
चहूँओर ऐसी अलख है जगाई
लगी नाचने कामिनी होश खोकर
अजब साँवरे तुमने लीला रचाई
यूँ भरोसा न सब पर किया कीजिए
यूँ भरोसा न सब पर किया कीजिए
कौन है दोस्त दुश्मन पता कीजिए
ठेस लगने न पाये कभी दोस्त को
ध्यान इस बात का भी रखा कीजिए
रूठ जाये अगर दोस्त तो आप ख़ुद
खैरियत उसकी जा कर लिया कीजिए
नाज हो दोस्ती पर सदा ही हमें
साथ इक दूसरे का दिया कीजिए
मुश्किलें ज़िन्दगी में कभी आ गई
राह में राहबर बन मिला कीजिए
कामिनी ये कहे दोस्तों दोस्ती
फर्ज है बस वफा से अदा कीजिए
आ गई है बहार सावन में
आ गई है बहार सावन में
बाजे दिल के सितार सावन में
लग गये वो भी आज इठलाने
उन पे भी है ख़ुमार सावन में
सौंधी धरती की हो गई ख़ुशबू
पड़ते ही इक फुहार सावन में
देखकर इन हॅंसी फ़िज़ाओं को
दिल हुआ बेक़रार सावन में
काग़ज़ी कश्तियां चलाते थे
मिल के बचपन के यार सावन में
तुम ज़रा बज़्म में सुना दो अब
गीत कुछ खुशगवार सावन में
कामिनी तुम संभालो दिल अपना
हो न जाये शिकार सावन में
प्यार के रंग चेहरे पे छाने लगे
वो जो दिल के मुहल्ले में आने लगे
प्यार के रंग चेहरे पे छाने लगे
होली होली है कह कर मेरे हमनवा
रंग मुझ पर गुलाबी उड़ाने लगे
जो हमें रोज छुप -छुप कभी देखते
जाम वो अब नजर के पिलाने लगे
नाच गाने लगे है सभी आज तो
मौज में ढोल ताशे बजाने लगे
देखकर रंग की यह बहारे सनम
ख़्वाब सतरंगी से झिलमिलने लगे
चाहते हो अगर जानो-दिल से हमें
क्यूँ हमारी वफा आज़माने लगे
जैसे राधा किशन खेलते रंग थे
उस बहाने कभी तो बुलाने लगे
आई कान्हा की टोली जब गाँव में
पर्व हिलमिल के सब ही मनाने लगे
कामिनी छोड़ दो गम की बातों को अब
आपके साथ हम मुस्कुरना लगे

डॉ कामिनी व्यास रावल
(उदयपुर) राजस्थान







