डॉ. कामिनी व्यास रावल की ग़ज़लें | Dr. Kamini Vyas Poetry

प्यार के रंग चेहरे पे छाने लगे

वो जो दिल के मुहल्ले में आने लगे
प्यार के रंग चेहरे पे छाने लगे

होली होली है कह कर मेरे हमनवा
रंग मुझ पर गुलाबी उड़ाने लगे

जो हमें रोज छुप -छुप कभी देखते
जाम वो अब नजर के पिलाने लगे

नाच गाने लगे है सभी आज तो
मौज में ढोल ताशे बजाने लगे

देखकर रंग की यह बहारे सनम
ख़्वाब सतरंगी से झिलमिलने लगे

चाहते हो अगर जानो-दिल से हमें
क्यूँ हमारी वफा आज़माने लगे

जैसे राधा किशन खेलते रंग थे
उस बहाने कभी तो बुलाने लगे

आई कान्हा की टोली जब गाँव में
पर्व हिलमिल के सब ही मनाने लगे

कामिनी छोड़ दो गम की बातों को अब
आपके साथ हम मुस्कुरना लगे

डॉ कामिनी व्यास रावल

(उदयपुर) राजस्थान

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