डॉ ऋतु शर्मा ननंन पाँडे की कविताएं | Dr. Ritu Sharma Pandey Poetry

ये साल

यह साल भी यूँ ही गुज़र जाने वाला है
चुनौतियों से भरा
कहीं पर युद्ध, तो कहीं बम बारी
आने वाले साल में न जाने क्या होगा
न जाने ग़मों की अन्धेरी रात होगी
या सुखों का सवेरा होगा
चलो शुक्र है हमको है यह पहले से नहीं पता
मिलेगा वही जो भाग्य में है लिखा
कुछ न कुछ तो हर एक को मिलेगा
कुछ बुरा तो शायद कुछ अच्छा भी होगा
भविष्य जानता नहीं कोई
समय जैसा भी होगा
हम सबको मिलकर
एक दूसरे का साथ निभाना होगा
ईश्वर से है प्रार्थना यही हमारी
शांति और सौहार्द की हो अब बारी
मंगलमय हो सबका जीवन
हँसता खेलता हो हर घर आँगन
नई उमंग और नई आशा
नई शुरुआत और नई दिशा
नव वर्ष में सबकी पूरी हो हर अभिलाषा

स्त्री

चूल्हा मिट्टी का हो या गैस का
रोटी बनाते समय
उँगलियाँ मेरी ही जली है
जली उँगलियों के साथ
चेहरे पर मुस्कान लिए
तुम्हारी स्वादिष्ट थाली
मैंने ही हमेशा सजाई है

जब जाते तुम काम पर
सारे दिन की थकान भूला
शाम को दरवाज़े पर मेरी ही
निगाहें तुम्हें खोजती हैं

गर्भ धारण से लेकर
प्रसव पीड़ा तक
सब सह लेती हूँ मैं
एक तुम्हारे भरोसे

तानों से छलनी हुए
ह्रदय में भी
तुमको नर्म और गर्म
कोना देती हूँ मैं अहसासों का

सिर्फ़ एक बेटी ही नहीं
बहूँ, पत्नी, माँ न जाने
एक ही पल में
कितने रिश्तों को
जीति हूँ मैं

कभी चौपड़ में दांव लगने को बाध्य
कभी धरा में समाने की मजबूरी
हर बार मैं ही छली जाती हूँ
हर बार कुलटा, चरित्रहीन
मैं ही कहलाती हूँ

फिर भी हर बार
एक नये जन्म मैं
फिर से धरती पर आती हूँ
क्यों की मुझे पता है
जिस दिन मेरा अस्तित्व
ख़त्म हो जाएगा
पुरूष तुम और तुम्हारा पौरुष
दोनों ही अर्थ हीन हो जाएगा ….

डॉ. ऋतु शर्मा ननंन पाँडे
( नीदरलैंड )

*कवियित्री व समाजसेवी

यह भी पढ़ें :-

गुडियाँ तुम्हारी | पितृ दिवस पर आधारित डॉ. ऋतु शर्मा की कविता

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2 Comments

  1. नववर्ष और स्त्री केंद्रित दोनों ही रचनाएंँ बहुत अच्छी हैं।

    स्त्री-जीवन के संघर्ष और उसके उदात्त भाव, दोनों ही हृदयस्पर्शी हैं।

    इन अच्छी रचनाओं के लिए आपको हार्दिक बधाई।

  2. आपको नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएंँ।

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