Dr. Sunita Singh Sudha Poetry

आँख का नूर बनो तो सही | Dr. Sunita Singh Sudha Poetry

आँख का नूर बनो तो सही

( Aankh ka noor bano to sahi )

 

बात दिल की कभी तुम कहो तो सही
सिर्फ तुम दिल में मेरे रहो तो सही

प्रीति की रोशनी जगमगा दो हृदय
दीप बाती-सरिस तुम जलो तो सही

जिन्दगी का है लम्बा सफर साथ में
दूर कुछ हमसफर तुम चलो तो सही

तुमपे वारा है जीवन ये सारा सनम
तुम कभी मेरी भी कुछ सुनो तो सही

छोड़ दो यूँ जमाने की उल्फत को तुम
अब खुले दिल से मुझसे मिलो तो सही

प्यार का आसरा दे किसी जान को
आँख का नूर तुम अब बनो तो सही

चोट खाई है दिल पर बहुत ये सुधा
प्यार से ज़ख्म को तुम भरो तो सही

 

Dr. Sunita Singh Sudha

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
( वाराणसी )
यह भी पढ़ें:-

मेरी ज़िन्दगी में थी ऐसी हसीना | Romantic Nazm in Hindi

 

Similar Posts

  • दिल को राहत है इस बहाने से

    दिल को राहत है इस बहाने से तेरी ग़ज़लों को गुनगुनाने सेदिल को राहत है इस बहाने से दिल में कितने ही उठ गये तूफांइक ज़रा उनके मुस्कुराने से लुत्फ़ आने लगा है अब मुझकोनाज़ नखरे तेरे उठाने से प्यार के सिक्के हैं बहुत मुझ पररोज़ लूटा करो खज़ाने से ढह गया है महल उमीदों…

  • मेरे भीतर | Rajni ki Ghazal

    मेरे भीतर ( Mere Bheetar ) चढ़ा अपने सनम के इश्क़ का पारा मेरे भीतरग़ज़ल कहने का मौज़ूं है बड़ा प्यारा मेरे भीतर रवानी बन गई है प्रेम की धारा मेरे भीतरहै ए’लान-ए-बहाराँ-सा ये इकतारा मेरे भीतर कहूँ कैसे मैं तुमसे दिल है बेचारा मेरे भीतरन जाने कबसे है पागल ये बंजारा मेरे भीतर तुम्हारे…

  • हर दिन | Har Din

    हर दिन ( Har din )    ज़िन्दगी हर दिन एक नयी चाल है इंसा दिन-ब-दिन हो रहा बेहाल है। कोई चराग बन जल रहा हर पल जाने किसका घर करे उजाल है। जो खो गया नाकामयाबी में कहीं देता कहाँ कोई उसकी मिसाल है। ख्वाहिशों का अपनी बोझ ढोते ढोते हर दिन वो कितना…

  • कितने | Kitne

    कितने ( Kitne )    पेड़ों से पत्ते बिछड़ गये कितने इस जग उपवन से उजड़ गये कितने सारा दिन अब ये चला रहे हैं फ़ोन इस युग के बच्चे बिगड़ गये कितने पहले हर कोई,गुनाहों से था दूर इस पथ को अब तो पकड़ गये कितने सबकी फ़रियादें,कहाँ सुनेगा रब इस दर पर माथा…

  • रानी भी भेज दो | Rani Bhi Bhej do

    रानी भी भेज दो ( Rani bhi bhej do )    मिसरा दिया है ऊला तो सानी भी भेज दो राजा के वास्ते ख़ुदा रानी भी भेज दो जब जा रहे हो तोड़ के रिश्ता -ऐ-वफ़ा वापिस मुझे हरेक निशानी भी भेज दो कर लूँ तुम्हारे झूठ पे ख़ुश होके मैं यक़ीं इतनी लतीफ़ कोई…

  • पहली मुलाकात | Ghazal Pehli Mulaqat

    पहली मुलाकात ( Pehli Mulaqat )   धीरे-धीरे वो घूँघट उठाने लगे । धड़कनें मेरे दिल की बढ़ाने लगे ।। १ आ गई रात वो जब मुलाकात की। देखते ही हमें वो लजाने लगे ।। २ देख जबसे लिया यार मैनें सनम । क्या कहूँ की कदम लड़खड़ाने लगे ।। ३ हार कर ही सदा…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *