एक ही थाली में मस्त हैं | Ek hi Thaali

एक ही थाली में मस्त हैं

( Ek hi thaali mein mast hai ) 

 

करते जो शहर भर में दूनाली से गश्त हैं।
हम हैं कि उनकी आम ख्याली से पस्त हैं।।

मवाली इन्हें समझे उन्हें समझे थे मसीहा,
सच में कि दोनों एक ही थाली में मस्त हैं।

आका हमारे जाम तोड़ते हैं आए- दिन,
हम हैं कि महज़ चाय की प्याली में मस्त हैं।

ऋण चढ़ रहा है सर पे हमारी प्रगति के नाम,
हम हैं कि वाहवाही या ताली में मस्त हैं।

तुम किसके आगे बीन बजाते हो ‘सोनकर’,
सब लोग तो अपनी ही जुगाली में मस्त हैं।।

 

डॉ के.एल सोनकर ‘सौमित्र’
जिला महासचिव जौनपुर यूनिट ‘प्रलेस’
खुज्जी,कर्रा कॉलेज चंदवक,जौनपुर (यूपी)

यह भी पढ़ें :-

कल भी था कल भी रहेगा | Kal bhi Tha Kal bhi Rahega

Similar Posts

  • मैं भी था | Main Bhi Tha

    मैं भी था तुम्हारे हुस्न-ओ-अदा पर निसार मैं भी थातुम्हारी तीर-ए-नज़र का शिकार मैं भी था मेरे गुनाह ख़ताएं भी फिर गिना मुझकोतेरी नज़र में अगर दाग़दार मैं भी था बहुत ही ख़ौफ़ ज़माने का था मगर सचमुचतुम्हें भी अपना कहूँ बेकरार मैं भी था यक़ी न होगा तुझे पर यही हक़ीक़त हैहसीं निगाहों का…

  • सुमंगला सुमन की ग़ज़लें | Sumangla Suman Poetry

    न कोई सफ़र, न किनारा मिला न कोई सफ़र, न किनारा मिलाहमें डूबने का इशारा मिला हवा साथ थी, फिर भी ठहरे रहेमुहब्बत में ना कुछ सहारा मिला कभी ख़्वाब लहरों पे लिखते रहेलिखा जो नहीं था, दुबारा मिला हमें ख़ार समझा था फूलों ने जबफ़िज़ा से वही फिर इशारा मिला भटकती रही कश्ती दरिया…

  • महाकुंभ

    ग़ज़ल ( महाकुंभ विशेष) आस्था की है लगी डुबकी सदा देखाभक्ति के नव रंग में सबको रँगा देखा कुंभ मेला को इलाहाबाद के पथ परसंत नागा साधुओं से नित भरा देखा भीड़ का उमड़ा हुजूम जयघोष हैं करतेधूल से घुटने पावों तक को सना देखा सूर्य तक उठता नदी जल अंजली में योंआचमन में हाथ…

  • क्यों वो देने लगे दग़ा जाने

    क्यों वो देने लगे दग़ा जाने क्यों वो देने लगे दग़ा जाने।क्या हुआ,क्या पता, ख़ुदा जाने। जिनका शेवा वफ़ाएं करना था।भूल बैठे वो क्यों वफ़ा जाने। कोई राह़त नहीं अभी तक तो।देखो कब तक चले दवा जाने। जिनसे उम्मीदे-लुत्फ़ होती है।वो ही करते हैं क्यों जफ़ा जाने। बस यही सोच कर तड़पता हूं।क्यों हुए मुझसे…

  • आँख का नूर बनो तो सही | Dr. Sunita Singh Sudha Poetry

    आँख का नूर बनो तो सही ( Aankh ka noor bano to sahi )   बात दिल की कभी तुम कहो तो सही सिर्फ तुम दिल में मेरे रहो तो सही प्रीति की रोशनी जगमगा दो हृदय दीप बाती-सरिस तुम जलो तो सही जिन्दगी का है लम्बा सफर साथ में दूर कुछ हमसफर तुम चलो…

  • उन्हीं पर हक़ नहीं अब तो हमारा | Haq Shayari

    उन्हीं पर हक़ नहीं अब तो हमारा ( Unhi par haq nahin ab to hamara )    यहाँ सब आइने टूटे हुए हैं ख़ुदी में लोग यूँ डूबे हुए हैं अभी उतरी नहीं शायद ख़ुमारी जो अपने आप में खोये हुए हैं बहारों का करें क्या ख़ैर मक़दम वो अपने आपसे रूठे हुए हैं उन्हीं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *