अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी पर निबंध
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी पर निबंध

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जिम्मेदारी पर निबंध

( Freedom Of Expression And Its Responsibility: Essay In Hindi )

 

प्रस्तावना ( Preface ) :-

मानवीय गरिमा को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से Freedom Of A Person को आवश्यक बताया गया है। भारत सहित दुनिया के अनेक देशों में सामाजिक स्तर पर व्यक्तियों को बोलने की स्वतंत्रता प्राप्त है।

इसका मकसद नागरिकों के नैसर्गिक अधिकारों के रूप में उनके Personal Freedom को संरक्षित करना है। जिससे मानव के व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास हो सके और उसके हितों की रक्षा हो सके।

इस तरह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक जीवन के लिये न्यायसंगत होने के साथ ही इसका अपरिहार्य अंग भी है।

स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति ( Freedom And Expression ) :-

लोकतंत्र की जीवंतता के लिए इस तरह के अधिकारों को आवश्यक माना जाता है। क्योंकि लोकतंत्र में व्यक्तिगत स्वतंत्रता का होना बेहद जरूरी है।

स्वतंत्रता चाहे अभिव्यक्त की हो, चिंतन करने की हो या फिर काम करने की हो, मानव के विकास के लिए एवं शोषण मुक्त समाज बनाने के लिए स्वतंत्रता बेहद जरूरी है।

लेकिन Freedom का यह मतलब नही है कि हम अनियंत्रित होकर कुछ भी व्यवहार करने लगे। यह बात अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी लागू होती है।

वास्तव में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नागरिकों के साथ यह जिम्मेदारी से खुद-ब-खुद जुड़ जाती है कि अपनी स्वतंत्रता का इस प्रकार से इस्तेमाल करें जिससे लोकहित वाद, कानून व्यवस्था सुचारू रूप से चलती रहे।

Freedom Of Expression  के अधिकार का प्रयोग करते हुए राष्ट्रीय एवं सामाजिक हितों को ऊपर रखना जरूरी है। प्रत्येक नागरिकों को चाहिए कि वे अपनी स्वतंत्रता का इस्तेमाल व्यक्तित्व के विकास के लिए करें न कि माहौल को बिगाड़ने के लिए।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमा ( Limits Of Freedom Of Expression ) :-

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का तार्किक रूप से प्रयोग करना बेहद जरूरी है। लेकिन यह बेहद निराशाजनक है कि भारत सहित विश्व के अनेक देशों में इसका मनमाने ढंग से दुरुपयोग किया जा रहा है।

कहीं पर तो Freedom Of Expression पर अतिवाद या फिर आतंकवाद का प्रभाव भी देखने को मिल रहा है जो इस बात की तरफ संकेत करता है कि हम अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ रहे हैं और जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में असफल है।

लोकतांत्रिक व्यवस्था के अंतर्गत वाक और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को अनिवार्य माना गया है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की अवधारणा बेहद व्यापक है।

इसमें व्यक्ति को अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने का अधिकार शामिल है। लेकिन साथ ही इसके व्यापक दुरुपयोग की भी संभावना बनी रहती है। जिससे कई बार अप्रिय स्थितियां पैदा हो जाती है।

Social Media  पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का दुरुपयोग अधिक देखने को मिलता है। लोग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में दूसरे धर्म का अपमान करने लगते हैं  ।

कभी-कभी आपत्तिजनक बयानों के चलते माहौल को बिगड़ने की कोशिश की जाती है। और इस अभिव्यक्ति को मुक्त अभिव्यक्ति कहा जाता है जो किसी भी तरह से उचित नही ठहराया जा सकती है।

Freedom Of Expression सही अर्थ में तभी समझ सकते हैं जब इससे जुड़ी जिम्मेदारी को भी समझा जाए। अभिव्यक्ति मे भावना और संवेदना का भी जुड़ाव होता है। इसमें कठोरता नही होनी चाहिए ।

भारतीय संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता ( Freedom Of Expression In Indian Constitution ) : –

Indian Constitution में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को मूल अधिकार में स्थान दिया गया है। लेकिन इसके दुरुपयोग की संभावना को ध्यान में रखते हुए इस पर कई तरह की परिसीमा और प्रतिबंध को भी बनाया गया है।

Indian Constitution के अनुच्छेद 19 से 22 तक स्वतंत्रता के अधिकार का वर्णन देखने को मिलता है। जिसमें अनुच्छेद 19 (क) के अंतर्गत भारत के प्रत्येक नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है। लेकिन यह नितांत निरंकुश नही है।

इसीलिए अनुच्छेद के 19 (ख) मे शर्त रखी गई है। भारत की प्रभुता एवं अखंडता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ महत्वपूर्ण संबंध, लोग व्यवहार, शिष्टाचार, न्यायालय की अवमानना, मानहानि जैसे अपराध को प्रोत्साहन देने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करने के लिए नियम बनाए जा सकते हैं।

निष्कर्ष (The conclusion) :-

Freedom Of Expression लोकतंत्र का आधार है। इसे मानव का मूल अधिकार भी बताया जाता है। लेकिन इस अधिकार के साथ नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई होती है।जिससे व्यक्ति अपने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को निरंकुश न समझे और अमर्यादित आचरण न करें।

बल्कि यह जन अभिव्यक्ति के रूप में हो अर्थात अभिव्यक्ति के साथ जनहित और जनकल्याण की भावना जुडी हुई हो। यह सृजनात्मक और रचनात्मक हो। यह किसी भी प्रकार से नकारात्मक और उथल-पुथल मचाने वाली न हो।

 

लेखिका : अर्चना  यादव

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