Child Labor Hindi essay

निबंध : भारत में बाल श्रम कारण एवं उन्मूलन हेतु सरकारी प्रयास

( Child Labor Causes and Indian Government Efforts for eradication)

 

प्रस्तावना ( Preface ) :-

बाल श्रम और बाल व्यापार भारत में आज के दिन में एक बड़ी समस्या है। भुखमरी, गरीबी, बाल श्रम और बाल व्यापार का एक प्रमुख कारण है।

बाल श्रम की समस्या देश के समक्ष सभी के लिए एक चुनौती के रूप में विद्यमान है। इस समस्या को सुलझाने के लिए विभिन्न सकारात्मक सक्रिय कदम सरकार द्वारा उठाए जा रहे हैं।

फिर भी समस्या के विस्तार और परिणाम पर विचार करते हुए मूलतः यह एक सामाजिक आर्थिक समस्या होने के कारण बिकट रुप में गरीबी और निरक्षरता से जुड़ी हुई है।

इस समस्या को सुलझाने के लिए समाज के सभी वर्गों द्वारा ठोस प्रयास करने की जरूरत है। भारत में राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण की परिभाषा के अनुसार 14 वर्ष से कम उम्र का बच्चा जो मजदूरी करता है वह बाल श्रमिक की श्रेणी में आता है।

बाल श्रम के प्रमुख कारण ( Major causes of child labor in Hindi ) :-

बाल श्रम की समस्या प्रमुख रूप से सामाजिक आर्थिक समस्या है। बालक की शारीरिक मानसिक क्षमता को यह बातें प्रभावित करती हैं।

आज यह एक गंभीर समस्या है क्योंकि बाला के कार्य करने विचार और अनुभव करने जैसे दृष्टिकोण के विकास की अवस्थाओं पर इस सब का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

बाल श्रम के प्रमुख कारण इस प्रकार से हैं- अशिक्षा, असाक्षरता के चलते अधिकारों के प्रति जागरूकता का अभाव, संयुक्त परिवार की संस्कृति व पारिवारिक मूल्यों में स्वेच्छिक का स्तर पर इस समस्या को बढ़ा दिया है।

वैश्वीकरण निजी करण और उपभोक्तावादी संस्कृति के विकास के साथ सस्ते श्रम की आवश्यकता और बच्चों की आर्थिक जरूरतों ने बाल श्रम को बढ़ावा दिया। केंद्र व राज्य स्तरीय राष्ट्रीय कानूनों के अभाव के चलते बाल श्रम की समस्या जस की तस बनी हुई है।

बंधुआ मजदूर ( Bonded labour ) :-

 आधुनिक विश्व में मानव तस्करी तथा बंधुआ मजदूरी एक चुनौती बन गई है। लंबे समय से असमानता के कारण समाज में अत्यंत गरीब लोग इसके शिकार हो जाते हैं।

शारीरिक और मानसिक रूप से भय दिखाकर किसी भी व्यक्ति को उसके मानवीय गरिमा तथा मूल्य से नीचे के स्तर का कार्य करवाया जाता है।

सरकार प्राथमिकता के आधार पर जहां एक तरफ गरीबी कल्याण योजनाओं को प्राथमिकता दे रही है वहीं दूसरी तरफ कानूनों को भी इतना सक्षम बनाने का प्रयास कर रही है कि किसी भी व्यक्ति का शोषण न हो सके।

ऋण चुकाने के नाम पर बंधुआ मजदूरी की बातें अफसर के सामने आती रहती हैं। यह एक ऐसी कुप्रथा के रूप में विकसित हो गई है, जिसमें कई पीढ़ियां सिर्फ ऋण चुकानों के नाम पर बंधुआ मजदूरी के लिए मजबूर हैं।

इस समस्या के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत थी। इस बात पर ध्यान देते हुए केंद्र सरकार द्वारा ऐसे श्रमिको के पुनर्निवास व उनको अधिक सक्षम और प्रभावी बनाने के लिए 17 मई 2016 के बंधुआ मजदूर पुनर्वास योजना 2016 शुरू की गई।

बाल श्रम रोकने हेतु सरकार के प्रयास ( Government efforts to stop child labor ):-

भारत का संविधान मौलिक अधिकार तथा राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के विभिन्न धाराओं के माध्यम से बाल श्रम के विषय में निम्नलिखित बातें करता है।

  • 14 वर्ष से कम उम्र का कोई भी बच्चा किसी फैक्ट्री या खदान में काम करने के लिए उपयुक्त नहीं है।
  • राज्य अपनी नीतियां इस तरह निर्धारित करें कि श्रमिकों पुरुषों और महिलाओं का स्वास्थ्य तथा उनकी सुरक्षा संभव हो सके।
  • कम उम्र के बच्चों का शोषण न हो वह अपनी उम्र और सख्त के प्रतिकूल काम आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए न करें।
  • बच्चों को स्वास्थ्य तरीके से स्वतंत्र व सम्मानजनक स्थिति में विकास के अवसर तथा सुविधाएं प्रदान की जाए।
  • बचपन और जवानी को नैतिक और भौतिक दुरुपयोग से बचाया जाए।
  • बाल श्रम एक ऐसा विषय है जिस पर राज्य सरकार तथा संघ सरकार दोनों ही कानून बना सकती हैं। दोनों ही स्तर पर यदि कोई कानून बनाए जाते हैं तो वह मान्य होंगे।

बाल श्रम के लिए विभिन्न राष्ट्रीय कानून ( Various national laws for child labor ) :-

  • बाल श्रम निषेध अधिनियम 1986 यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को 13 पेसो और 57 कामो में जिन्हें बच्चों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए अहितकर माना गया है नियोजन को निषेध कर देता है। इन पेसों और प्रक्रियाओं का उल्लेख कानून की सूची में दिया गया है।
  • फैक्ट्री कानून 1948 यह कानून 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के काम को निश्चित करता है।
  • 15 से 18 वर्ष तक के बच्चे किसी फैक्ट्री में तभी नियुक्त किए जा सकते हैं, जब उनके पास अधिकृत चिकित्सक का फिटनेस प्रमाण पत्र हो। 15 से 18 वर्ष के बच्चों के लिए हर दिन 4:30 घंटे की कार्य अवधि तय की गई है।

बाल श्रम निषेध और विनिमय संशोधन अधिनियम 2016 के प्रमुख विशेषताएं

  • बाल श्रम को पूरी तरह से खत्म करना, शिक्षा के अधिकार को इस विधेयक से जोड़ दिया गया है।
  • विधेयक के प्रावधानों के उल्लंघन पर कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान है।
  • कब और कितनी सजा देनी है यह बढ़ा दी गई है।
  • बच्चों के कल्याण और उनके कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत पर बल दिया गया है।
  • पुनर्निवास का प्रावधान किया गया है।
  • कठिन कार्यों में श्रम निषेध की बात कही गई है।

निष्कर्ष ( Conclusion ) :-

बाल श्रम की समस्या पर सरकारी एवं कानूनी उपायों की जरूरत है लेकिन इसके साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और सहयोग की भूमिका को भी स्वीकार किया जाना चाहिए।

सामाजिक रूप से प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी तथा इस तरह के अपराधों को रोकने की दिशा में जागरूकता का प्रसार किया जाये।

इस काम में कुछ गैर सरकारी संगठन एवं समाज के अन्य क्षेत्रों के लोग काम भी कर रहे हैं लेकिन वैश्विक स्तर पर काम करने की जरूरत है।

एक सुंदर समाज और सुंदर देश के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों से बंधुआ मजदूरी के समूल समाप्त कर कर देना एक चुनौतीपूर्ण काम है। देश और संविधान के प्रति हमारा यह कर्तव्य है कि इस दिशा में प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाये।

 

लेखिका : अर्चना  यादव

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