गरीबी ने बचाई लाखों की जान !

गरीबी ने बचाई लाखों की जान | Garibi par kavita

गरीबी ने बचाई लाखों की जान !

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गरीबी ने गरीबों को बचाया?
इसी ने कोरोना को है हराया।
यह मैं नहीं विशेषज्ञ कह रहे हैं,
गरीब देशों में कोरोना के कम आंकड़े
तो यही बतला रहे हैं;
गरीबों के संघर्ष की गाथा गा रहे हैं।
मुझे तो बस भगवान/ईश्वर/अल्लाह ही याद आ रहे हैं।
जी हां…
मैं तो इतना ही कह सकता हूं-
गरीबों के मालिक हैं भगवान,
वही करते इनके सारे काम आसान।
यह पुनः साबित हुआ है,
कोरोना काल में कुछ ऐसा ही हुआ है।
ईश्वर ने ही कोरोना से गरीबों की हिफाजत की है,
वरना दौलतमंदों ने तो रोजी-रोटी भी छीन ली है।
सम्पन्न देशों में तबाही बड़ी हैं,
वहां की जनता लाखों में मरी है।
एशिया-अफ्रीका के गरीब देशों में कोरोना से मृत्युदर ,
यूरोप अमेरिका की अपेक्षा काफी कम है;
कठिन परिस्थितियों में जीवन जी रहे लोगों
पर संक्रमण नगण्य है।
पहले WHO ने यहां भारी तबाही की आशंका थी जताई,
लेकिन छह माह बाद रिपोर्ट उलट है आई।
कमतर स्वास्थ्य सेवाएं और स्वच्छता का अभाव भी,
गरीबों का कुछ न बिगाड़ सकी!
डाॅक्टरों ने कहा कि –
ग़रीबी ने बचाई लाखों की जान,
सुन हो रहे होंगे आप भी हैरान।
पर यह सत्य है,
अकाट्य है;
अटल भी है।
अफ्रीकी देशों में इक्कीस हजार मौतें हुई हैं-
जो यूरोपीय देशों से दस गुना कम है,
इसलिए कहते हैं कि कुदरत के करिश्मा में दम है।
इटली, ब्रिटेन, मैक्सिको में मृत्यु दर 10 के करीब है,
वहीं द.अफ्रीका, नाइजीरिया, इथियोपिया में 2 या 2 से कम है।
इसका एक प्रमुख कारण अफ्रीकियों का युवा होना भी है,
जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता मजबूत है;
यही पुख्ता सबूत है।
कम उम्र का होना गरीब देश में लोगों की मदद कर रही है,
कोरोना संक्रमित नहीं होने दे रही है।
एक अफ्रीकी की औसत आयु 19 वर्ष है
जबकि ब्रिटेन अमेरिका में यह 40 से अधिक है।
इसलिए कोरोना ने यूरोप अमेरिका में कहर ढाया है,
गरीब देश के गरीबों को बचाया है।
सब ऊपर वाले की माया है,
गरीबों पर सदैव ईश्वर की छाया है।
बचपन से पढ़ते सुनते आ रहे हैं,
आज स्वयं अपनी आंखों से देख रहे हैं।
कबीर दास के दोहे बखूबी चरितार्थ हो रहे हैं-
“जाको राखे साइयां मार सके ना कोय
बाल न बांका कर सकेगा जो जग बैरी होय”

 

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नवाब मंजूर

लेखक– मो.मंजूर आलम उर्फ नवाब मंजूर

सलेमपुर, छपरा, बिहार ।

 

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