लगा आज

लगा आज | Geet Laga Aaj

लगा आज

( Laga Aaj )

लगा आज
हँसने का दिन हैै ,
उसके मन
बसने का दिन है .

निकल गए जो बच राहों से ,
फिसल गए बहकी बाहों से .
वे लम्हे
कसने का दिन है .

पड़ी चमेली अब ये झुलसी ,
तुलसी भी अब लगती हुलसी .
गर्मी में
चसने का दिन है .

अश्व सूर्य के दौड़ गए हैं ,
साँझ अकेली छोड़ गए हैं
बिना बात
खसने का दिन है ।

Rajpal Singh Gulia

राजपाल सिंह गुलिया
झज्जर , ( हरियाणा )

यह भी पढ़ें :-

गुलिया के दोहे | Gulia ke Dohe

Similar Posts

  • तेरा साथ है | Geet Tera Sath

    तेरा साथ है ( Tera sath hai )   मौसम में बहारों में, सपनों चांद सितारों में। मुश्किलों अंधियारों में, अपनों गैर हजारों में। तेरा साथ है आंधी और तूफानों में, मधुबन और वीरानों में। गीत गजल गानों में, प्यार भरे अफसानों में। प्रीत भरे तरानों में, दिल के हसीं अरमानों में। हानि और नुकसानों…

  • अखिल विश्व में

    अखिल विश्व में अखिल विश्व में ऐसा मौसम ,फूले और फले ।पुरवाई से पछियाओ भी ,खुलकर मिले गले।। छोटे और बड़े का कोई ,कभी न दम्भ भरे ।एक दूसरे के भावों का ,आदर हुआ करे ।मानवता का दीप क्षितिज पर ,जगमग सदा जले ।।अखिल विश्व में —– कोयल कुहके महके अमुआ ,बजे नित मल्हार ।शब्दों…

  • देख लिया | Geet Dekh Liya

    देख लिया ( Dekh Liya ) अन्तस लहरों में ज्वार उमड़ता देख लिया। उनकी आँखों में प्यार छलकता देख लिया ।। कैसी सुगंध यह फैल रही उर-उपवन में। जब खिला सरोवर में कोई जलजात नहीं। किसने इस मन को बाँध लिया सम्मोहन में। साँसें महकीं या प्राण जले कुछ ज्ञात नहीं । अब डोल रहा…

  • काल करे सो आज कर | Kaal Kare so Aaj Kar

    काल करे सो आज कर ( Kaal kare so aaj kar )   कर लो जो भी काम जरूरी, हौसलों की परवाज भर। कल का क्या भरोसा प्यारे, काल करे सो आज कर। काल करे सो आज कर व्योम तलक तुम छा जाओ, जीत का परचम लहराओ। हौसलों की भरो उड़ाने, दुनिया को करतब दिखलाओ।…

  • चल अकेला | Geet chal akela

    चल अकेला  ( Chal akela )    चल अकेला चल अकेला छोड़ मेला। चलने में झिझकन ये कैसी जब तूं आया है अकेला।‌।चल० कंचनजड़ित नीलमणित महल सब अध्यास हैं ये, सत्य कंचन मनन मंथन मणि तुम्हारे पास हैं ये, तूं अमर पथ पथिक जबकि जगत है दो-दिन का मेला।।चल० गगनचुंबी सृंग अहं किरीट मनस मराल…

  • शत: शत: प्रणाम | Geet Shat Shat Pranam

    शत: शत: प्रणाम ( Shat Shat Pranam ) हिमालय की शान को, माँ, गंगा की आन को, सागर के सम्मान को, झरनों की मधुर तान को इंद्रधनुषी आसमान को, मेरे वतन की शान को शत: शत: प्रणाम है, मेरा शत: शत: प्रणाम है !! १ !! गीता और कुरआन को वेदो को और पुराण को,…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *