बिठा तब है मज़ा

बिठा तब है मज़ा

बिठा तब है मज़ा

पास मुझको तू बिठा तब है मज़ा
जाम आँखों से पिला तब है मज़ा

प्यार करता है मुझे तू किस तरह
बात यह खुलकर बता तब है मज़ा

बज़्म में आते ही छा जाता है तू
यह हुनर मुझको सिखा तब है मज़ा

डस रहीं हैं मुझको यह तन्हाइयां
इनसे तू आकर बचा तब है मज़ा

होश खो देता हूँ जिस को देखकर
फिर से वो जलवा दिखा तब है मज़ा

ढल रही है शाम कुछ ही देर में
मयकदा जल्दी सजा तब है मज़ा

है पड़ी ज़ंजीर साग़र पाँव में
फिर भी हो वादा वफ़ा तब है मज़ा

Vinay
कवि व शायर: विनय साग़र जायसवाल बरेली
846, शाहबाद, गोंदनी चौक
बरेली 243003
यह भी पढ़ें:-

Similar Posts

  • महक जिसकी | Mahak Jiski

    महक जिसकी ( Mahak Jiski ) नशे में है जवानी लिख रही हूँ हुआ है ख़ून पानी लिख रही हूँ महक जिसकी फ़िज़ाओं में बसी है वही गुल रात रानी लिख रही हूँ उजाड़ी जिसने मेरे दिल की बस्ती उसी की शादमानी लिख रही हूँ वफ़ादारी जो शिद्दत से निभा लें वहीं हैं खानदानी लिख…

  • जाने क्यों बेख़बर नहीं आती

    जाने क्यों बेख़बर नहीं आती जाने क्यों बेख़बर नहीं आतीढ़ाने मुझपर कहर नहीं आती ताकते क्यों हो तुम गली उसकीआजकल वो नजर नहीं आती मैं हूँ मजबूर आज जीने कोयाद वह इस कदर नहीं आती देखकर हार बैठा दिल जिसकोवो भी लेने ख़बर नहीं आती तू उसे खोजता है क्यों दर दरवो कभी इस डगर…

  • उसका मज़ा ले

    उसका मज़ा ले गुलों सी ज़िन्दगी अपनी खिला लेजो हासिल हो रहा उसका मज़ा ले मुहब्बत हो गई है तुझको मुझसेनिगाहें लाख तू अपनी चुरा ले खरा उतरूंगा मैं हर बार यूँहींतू जितना चाहे मुझको आज़मा ले लुटा दूँगा मैं चाहत का समुंदरकिसी दिन चाय पर मुझको बुला ले घटा छाती नहीं उल्फ़त की हर…

  • आँखों आँखों में दास्तान हुई | Vinay Sagar Poetry

    आँखों आँखों में दास्तान हुई ( Aankhon aankhon mein dastan hui ) आँखों आँखों में दास्तान हुई यह ख़मोशी भी इक ज़बान हुई इक नज़र ही तो उसको देखा था इस कदर क्यों वो बदगुमान हुई कैसा जादू था उसकी बातों में एक पल में ही मेरी जान हुई इस करिश्मे पे दिल भी हैरां…

  • बात जब भी चली मुहब्बत की

    बात जब भी चली मुहब्बत की बात जब भी चली मुहब्बत कीदास्ताँ फिर लिखी मुहब्बत की नफ़रतों का अँधेरा छाया हैकर दो तुम रौशनी मुहब्बत की रूह से रूह को ही निसबत हैये है पाकीज़गी मुहब्बत की तंज़ कसता है तो ज़माना कसेहम करें शायरी मुहब्बत की रोज़े अव्वल से आज तक हमनेदेखी दीवानगी मुहब्बत…

  • तिरंगो से सज़ा देखो वतन है | Tirango se Saja

    तिरंगो से सज़ा देखो वतन है  ( Tirango se saja dekho vatan hai )    तिरंगो से सज़ा देखो वतन है गुलों से यूं भरा अपना चमन है सलामत ए ख़ुदा रखना हमेशा वतन का जो हसीं मेरे फ़बन है नहीं आये कभी कोई मुसीबत वतन में रब सदा रखना अमन है किसी में बू…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *