यहाँ संहार राखी का | Ghazal Sanhar Rakhi ka

यहाँ संहार राखी का

( Sanhar Rakhi ka )

मनाएँ हम यहाँ कैसे बता त्यौहार राखी का ।
नहीं बहनें हिफ़ाज़त में यहाँ बाज़ार राखी का ।। १

मिटा दो पर्व राखी का कहाँ अब मान होता है ।
जहाँ बहनें गई लूटी वहाँ त्यौहार राखी का ।। २

सभी की हैं यहाँ बहनें कलाई ही बताती है ।
बताओ कौन करता है यहाँ संहार राखी का ।। ३

चले आए उठाकर सर बहन अब बाँध दो राखी ।
बचा पाएँ न अस्म़त को जताएँ प्यार राखी का ।। ४

प्रखर कितना निभाते हो यहाँ तुम प्य़ार बहनों से ।
कलाई जब रही सूनी किया तकरार राखी का ।। ५

महेन्द्र सिंह प्रखर 

( बाराबंकी )

यह भी पढ़ें:-

महेन्द्र सिंह प्रखर के मुक्तक | Mahendra Singh Prakhar ke Muktak

Similar Posts

  • हैरत ही सही | Hairat hi Sahi

    हैरत ही सही ( Hairat hi Sahi ) मुझको सच कहने की आदत ही सहीहो अगर तुझको तो हैरत ही सही तंज़ और तल्ख़ी का आलम तौबाउनकी बातों में हक़ीक़त ही सही हम ज़ुबां रखते हैं मुहब्बत कीतेरे लब पे है कुदूरत ही सही दिल को भाए जो वही करते हैंदेते वो हमको नसीहत ही…

  • ऐसी कोई सरकार आ जाये | Aisi Koi Sarkar

    ऐसी कोई सरकार आ जाये हमारे मुल्क में ऐसी कोई सरकार आ जाये सभी के हाथ में अच्छा सा कारोबार आ जाये खुली सड़को पे पीते हैं शराबी बोतलें लेकर इलाक़े का भला ऐसे में थानेदार आ जाये वबा की मार से हर रोज़ ही इंसान मरते हैं करोना की दवा इस बार तो दमदार…

  • चाहता है तिरंगा | Poem on Tiranga in Hindi

    चाहता है तिरंगा ( Chahta hai tiranga )   सर भी झुकते हैं लाखों नमन के लिए जान देते हैं जो भी वतन के लिए सिर्फ़ नारों से क्या होगा ऐ दोस्तो रौनक़े बख़्श दो अंजुमन के लिए मेरे बच्चों से उनकी ख़ुशी छीन ली और क्या चाहिए राहज़न के लिए पीठ पर गोलियाँ तुम…

  • लम्हा भर है जिंदगी | Zindagi pe Shayari

    लम्हा भर है जिंदगी ( Lamha bhar hai zindagi )    सबसे तू हँस बोल ले प्यारी भवर है जिंदगी साँस के बस एक झोंके का सफ़र है जिंदगी जिंदगी जी ले जी भर मत सोच ज्यादा अब इसे क्या पता वर्षों की है या लम्हा भर है जिंदगी खोज ले पल हसरतों के कुछ…

  • मिली जब से मुहब्बत

    मिली जब से मुहब्बत मिली जब से मुहब्बत हम सफ़र की बात करते हैंहुईं पूरी मुरादें , रहगुज़र की बात करते हैं बड़े नादान है अब पूछते दिल में हमारे क्याये दिल हम हार बैठे अब जिगर की बात करते हैं सफ़ीना आज मेरा जब फँसा है इस भँवर में तोकरें हम याद रब को…

  • पहली दफ़ा | Pehli Dafa

    पहली दफ़ा ( Pehli Dafa )   जबसे तुम्हें देखा है जीने की हसरत हुई है, पहली दफ़ा ख़ुद से हमको मोहब्बत हुई है, सुन ज़रा तू ऐ मेरे हमराज़ ऐ मेरे हम-नशीं, तेरे आने से मुर्दा-ए-दिल में हरकत हुई है, तू पास है दिलमें जश्न-ए-बहारां हर रोज़ है, तेरे बिन तो फ़क़त ख़िजाँ की…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *