गुरू जीवन | Guru Jeevan

गुरू जीवन

( Guru Jeevan )

एक गुरू जीवन में मैंने भी है पाया,
जिसने हर कदम पर निस्वार्थ मेरा साथ निभाया,
जब भी मुझ पर संकट छाया,
हर वक्त साथ रहा बनकर हमसाया,
बचपन में ही अपना दमखम दिखलाया,
फल समझ सूर्य को ही निगल आया,
भूत प्रेत को भी खूब भगाया,
पवनपुत्र जो नाम कहलाया,
भईया लक्ष्मण के प्राणों को बचाया,
श्री राम जी के अति प्यारे सियाराम के मन को भाया,
लंका को जलाकर रावण का अहम जलाया,
ये सब तो रावण के भी समझ ना आया,
विभीषण ने परखा जब भरी सब सभा में,
तो चीर के सीना सबको दिखलाया,
ऐसा एक गुरू मैंने भी पाया,
जिसने जीवन जीने का मुझे सही मार्ग सिखाया,
संकटमोचन,अंजनीपुत्र, वीर हनुमान या कहो बजरंगबली,
ये मेरा अहम हिस्सा मुझको अति भाया,
धन्य हो गया मेरा ये जीवन जो भाई, सखा, गुरू सब तुम में ही पाया।।

योगेश किराड़ू
बीकानेर राजस्थान

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माँ बहुत याद आती है

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