भूख और पेट ( Bhookh aur pet ) सड़क पुल नदियों को निगले डकार नहीं लेते आंधी है या कोई तूफान बहार आने नहीं देते कुछ को धन की भूख है कुछ का पेट बहुत बड़ा जाने कितने ही घोटालों का हंगामा हो गया खड़ा भुखमरी बेरोजगारी अब गरीबी दूर होनी चाहिए…
तू कौन है तू क्या है ( Tu kaun hai tu kya hai ) कैसे बतावू तु कोन हे मेरे लिए, तु क्या है मेरे लिए || बचपन का रंगबिरंगी किस्सा है तु दिल के करीब का हिस्सा है तु कड़कती धूप मे छाव है तु, मेरे लिए एक गाँव हैं तु — ऐ…
दशानन क्यों नहीं मरता है ( Dashanan kyon nahin marta hai ) घर-घर में मंथरा बैठी रावण घट घट बसता है महंगाई सुरसा सी हो गई आदमी अब सस्ता है ना लक्ष्मण सा भाई हनुमान सा भक्त कहां मर्यादा पुरुषोत्तम फिर से आप आओ यहां कलयुग में मर्यादा ढह गई मन में…
अमर दुनिया की हरवस्तु जन्म लेती हैऔर मरती हैइस मरणधर्माजगत में अमर कीकल्पना करने वालाकोई महान हीकल्पनाकार होगाकर्मों के सही सेक्षयोपशम होने परमनुष्य भव मेंसही से कर्मों काक्षयकर संपूर्णज्ञान प्राप्त होनेपर मिलन जबआत्मा से स्वयं काहोता तो आत्माके शुद्ध रूप सेफिर कोई भेदभेद न रहताज़िंदगी का सफ़रआयुष्य जितनाकेवली का होताधर्म का हीउस अवस्था मेंपहुँचने का…
प्यार का ए ख़ुदा अब गुलाब चाहिए! ( Pyar ka e khuda ab gulab chahie ) प्यार का ए ख़ुदा अब गुलाब चाहिए! इक हंसी जिंदगी में ज़नाब चाहिए नफ़रतों के पन्ने पड़ लिये ख़ूब है प्यार की उम्रभर अब क़िताब चाहिए जो ख़ुशी से भर दें दामन मेरा सदा ऐसा…
परिवार सब टूट रहे हैं संस्कार छूट रहे हैं कुटुंब परिवार सब टूट रहे हैं। संदेह के घेरे फूट रहे हैं अपने हमसे रूठ रहे हैं। घर-घर दांव पेंच चालों का दंगल दिखाई देता है। कलही कारखाना घर में अमंगल दिखाई देता है। संस्कारों की पतवार जब भी हाथों से छूट जाती है। परिवार की…