गुरु की महिमा
गुरु की महिमा
गुरु की महिमा सबसे न्यारी
गुरु ज्ञान की खान है।
राह दिखाते हैं सबको ही
मिल जाते भगवान है।।
बीच भंवर में डूब ही जाता
गुरु की बात न मानी,
अमृत – रस बरसाने वाली
है सदगुरु की वाणी।
गुरु के चरणों में ही रहकर
मिल जाता सम्मान है।
गुरु की महिमा…..।।
पुष्प चढ़ाऍं – शीश झुकाऍं
करें वंदना मिलकर सारे,
खुशियों की सौगात मिलेगी
गुरु होंगे जब बीच हमारे।
मिल जाए आशीष गुरु का
हम बालक नादान हैं।
गुरु की महिमा…..।।
भव सागर से पार लगा दो
नैय्या आज हमारी,
विपदा आन पड़ी है देखो
गुरुवर हम पर भारी।
सर्वोपरि है गुरु की सेवा
जग में गुरु महान है।
गुरु की महिमा…..।।
अज्ञानी – पापी हैं हम तो
सबको राह दिखा दो,
अंधकार में भटक रहे हैं
सोए भाग जगा दो।
काम,क्रोध,मद,लोभ में डूबा
सारा आज जहान है।
गुरु की महिमा…..।।

डॉ. भेरूसिंह चौहान “तरंग”
४रोहिदास मार्ग , झाबुआ
जिला – झाबुआ (म. प्र.)
पिन : ४५७६६१
मो.नंबर : ७७७३८६९८५८
यह भी पढ़ें:-







