Haal-E-Dil

हाल-ए-दिल बताना है | Haal-E-Dil

हाल-ए-दिल बताना है

( Haal-e-dil batana hai ) 

 

हाल -ए – दिल उसे बताना है।
आज कुछ भी नहीं छुपाना है।

प्यार करके ये दिल बहुत रोया,
और पीछे पड़ा ज़माना है।

आँसुओं से लिखे है ख़त मैने,
क्यूँ बना वो रहा बहाना है।

बेवफ़ा वो नहीं पता मुझको,
जान है वो उसे मनाना है।

ज़िंदगी में तो कुछ रहा होगा,
बन गया ख़ुद-ब-ख़ुद फ़साना है।

गर बढ़ाना है हौसला मेरा,
प्यार का दीप फिर जलाना है।

 

Dr. Sunita Singh Sudha

डा. सुनीता सिंह ‘सुधा’
( वाराणसी )
यह भी पढ़ें:-

हो गई खता यूँ ही | Khata Shayari

 

Similar Posts

  • ले गया सकूँ | Sukoon Shayari in Hindi

    ले गया सकूँ ( Le gaya sukoon )    न रही उसको अब उल्फ़त है ? ले गया सकूँ सब राहत है चोट लगी ऐसी दग़ा की कल अब उल्फ़त दिल से रुख़सत है गुल न लिया चाहत का उसने टूटी दिल की ही हसरत है उल्फ़त में ऐसा टूटा दिल न यहाँ दिल को…

  • गुजारा है आजकल | Gujara hai Aajkal

    गुजारा है आजकल ( Gujara hai aajkal )    चुपचाप रहोगे तो गुजारा है आजकल बर्बाद ये निज़ाम ही सारा है आजकल। हर आदमी की शख़्सियत में राज सौ छिपे कैसे बताएं कौन हमारा है आजकल। कमबख़्त दिल है ढीठ तलबग़ार उन्हीं का उनपर ही दिलो जान से हारा है आजकल। मशहूर हैं जनाब जमाने…

  • है इबादत मुहब्बत | Hai Ibadat Muhabbat

    है इबादत मुहब्बत ( Hai Ibadat Muhabbat ) है इबादत मुहब्बत, मुहब्बत करें शहर में क्यों किसी से अदावत करें मुल्क पर राज करना अलग बात है हो सके तो दिलों पर हुकूमत करें आँच आने न देंगें वतन पर कभी मिल के हम नेकियों की हिदायत करें दोस्तों से कहो आज फिर मुल्क के…

  • बहुत देखा | Bahut Dekha

    बहुत देखा ( Bahut Dekha ) भरी बज्म में उनको लाचार बहुत देखाबुझी आँखो में तड़पता प्यार बहुत देखा युँ तो हम भी हमेंशा रहे कायल उनकेबिना वजह के रहे शर्मसार बहुत देखा हमने कभी न देखा वादा खिलाफ होतेसामने आने में इंतजार बहुत देखा सामने सच ला न सकें झूठ बोला न गयामुहब्बत की…

  • मंज़िल की जुस्तुजू | Manzil ki Justuju

    मंज़िल की जुस्तुजू ( Manzil ki Justuju ) मंज़िल की जुस्तुजू थी मैं लेकिन भटक गयामैं शहरे दिल को ढूँढने यूँ दूर तक गया आहट जो आने की मिली मुखड़ा चमक गयादिल याद कर के जल्वों को तेरे धड़क गया रिश्तों का ये पहाड़ ज़रा क्या दरक गयानाराज़ हो वो ख़त मेरे दर पर पटक…

  • क्या पता कौन थे कहाँ के थे

    क्या पता कौन थे कहाँ के थे आते जाते जो कारवाँ के थेक्या पता कौन थे कहाँ के थे पंछियों को मुआवज़ा क्यों नइंरहने वाले इसी मकाँ के थे इत्र से कुछ गुरेज यूँ भी हुआफूल वो भी तो गुलसिताँ के थे सब हमेशा रहेगा ऐसे हीसारे झंझट इसी गुमाँ के थे एक रस्ता था…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *