हार हो गई

हार हो गई | Haar ho Gai

हार हो गई

( Haar Ho Gai )

सारी मेहनत बेकार हो गई
इस बार भी हार हो गई
कोशिश की थी बहुत हमने
मगर बेवफा सरकार हो गई ।

बड़ी मेहनत से उसको पाया था
बड़ी मुश्किल से करीब लाया था
अचानक वह फरार हो गई
किस्मत फिर दागदार हो गई ।

पास आकर वो चली गई
किस्मत फिर से छली गई
ख्वाब देखता रहा उम्रभर
धीरे-धीरे जवानी ढली गई।।

दोष अपना है कि जमाने का
क्या खता है दीवाने का
नौकरी आकर चली जाती है
दोष लगता फिर एक बहाने का।।

कवि : रुपेश कुमार यादव ” रूप ”

औराई, भदोही ( उत्तर प्रदेश।)

यह भी पढ़ें :-

Similar Posts

  • तल्ख़ मेहनाजपुरी की तीन रचनाएं | Talkh Mehnajpuri Poetry

      01. अधिक अन्न उपजाओ ——– ‘अधिक अन्न उपजाओ’ जो नारा लगाते हैं भर पेट अन्न सिर्फ वही पाते हैं. जो सचमुच अधिक अन्न उपजाते हैं, रात में भूखे ही सो जाते हैं. आइए मिल -जुल कर ‘अधिक अन्न उपजाओ’ नारा लगायें , जन -जन की भूख मिटायें , देश से ग़रीबी हटायें. 02. चरखा…

  • कन्या और दान | shadi poem in hindi

    *कन्या और दान* ( Kanya Or Daan )    जबसे बिटिया हुई सयान चिंता में है बाप की जान  नित्य  धरावे  नारी  ध्यान  जल्दी कर दो कन्यादान  घर -वर ढूढ़े फिर बाप परेशान कहां   मिले   अच्छा  मेहमान घर मिले अच्छा तो वर नहीं अच्छा बर  मिले  अच्छा तो घर नहीं अच्छा घर- वर अच्छा तब…

  • दीवार | Kavita Deewaar

    दीवार ( Deewaar ) ( 2 ) होते थे कभी मकान मिट्टी के कच्चे मगर उनमे पलते थे प्यार पक्के आज बढ़ने लगे हैं मकान पक्के मगर रिश्ते दिल के हो गये हैं कच्चे कभी होते थे रिश्ते खून के अपने अब अपने ही करने लगे खून रिश्तों का चलने लगे हैं खेल चौसर के…

  • पिता का अस्तित्व | Kavita Pita ka Astitva

    पिता का अस्तित्व ( Pita ka Astitva )   पिता पी ता है गम जिंदगी के होती है तब तैयार कोई जिंदगी गलकर पी जाता है स्वप्न पिता बह जाती है स्वेद मे हि जिंदगी औलाद हि बन जाते उम्मीद सारे औलाद पर हि सजते है स्वप्न सारे औलाद मे हि देता है दिखाई जहाँ…

  • वसन्त – दोहायन | Basant poem

    “वसन्त – दोहायन” ( Basant dohayan )   मेटे ऋतु सन्देश ने, सभी कठिन सन्त्रास! हुई प्रतीक्षापूर्ण और, सफल हुए आयास !!   हैअब पुष्पित औ’फलित,जन्मजन्म की प्रीत! पास अवनिके आगया, फिर वसन्त मनमीत !!   आया अब गुदगुदाता, लिए विमल अनुराग! गुन गुन करते भ्रमरसा, खोजक पुष्पपराग !!   धरा वसंती हो गई, अनुभव…

  • कलम का जादू चलाओ

    कलम का जादू चलाओ लिखने वालों कलम उठाओ लो तेरी सख्त जरूरत है बदलनी देश की सूरत है गर रहे अभी मौन सोचो आगे संभालेगा कौन? नवजवानों किसानों आमजन की खातिर लिखो, कुछ दो सुझाव, जो उनके हक की है बताओ , समझाओ। करो रहनुमाई, क्या है इस बदलती आबो-हवा की दवाई? कैसे पटरी पर…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *