हौसला मेरा अभी है बुलंद

हौसला मेरा अभी है बुलंद

हौसला मेरा अभी है बुलंद

मंजिल को पाना मेरी है पसंद
हौसला मेरा अभी है बुलंद
मेरा हौसला ही है मेरी मंजिल
दुश्मन भी मेरा मुझे क्या मात दे
मेरे साथ है ईश्वर सदा मेरा साथ दे
रब साथ है परेशान मेरा क़ातिल
भुजाओं में मेरी अब भी जोश है
अभी खोया नहीं मुझे होश है
रखुगां सदा अपना होश राह जटिल
सत्य की राह पर मैं चलूंगा सदा
मैंने किया अपनी मां से ये वायदा
चाहे लाख राह में हो मुश्किल
मेरे जीवन में नहीं है कोई पर्दा
सदा मैं करूं खुदा को सजदा
खुदा सीख दें न करना जीवन बोझिल
मेरे संस्कार ही है मेरी सदा संपदा
जीवन में मेरे है सदा ये कायदा
जीवन में रहना सदा सबके संगदिल
अ दिल सुन कर्म ही है जीवन का सार
कर्म के बिना यहां सबका जीवन बेकार
कर्म हीन ही है जहां में बुजदिल
कर्म से पास लाऊंगा अपनी मंजिल
काॅंटें चुन कर राहों से मै बनुगा काबिल
प्यारा दिल मेरा है नेकदिल

सुनील कुमार
नकुड़ सहारनपुर
उत्तर प्रदेश भारत

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