Heart touching ghazal in Hindi

मुझको दिखाता हर लम्हा गरूर है | Heart Touching Ghazal in Hindi

मुझको दिखाता हर लम्हा गरूर है!

( Mujhko dikhata har lamha garoor hai )

 

 

मुझको दिखाता हर लम्हा गरूर है!

हर व़क्त रखता वो चेहरा गरूर है

 

तुझसे  ख़ुदा ख़फ़ा होगा बहुत मगर

करना  नहीं  मगर अच्छा गरूर है

 

यूं हाथ कल नहीं उससे मिलाया है

हर बात में बहुत करता गरूर है

 

देखो समझने से माना नहीं बातें

उसका नहीं कभी उतरा गरूर है

 

हर बात में करे है हट सी रोज़ वो

उसपर चढ़ा बहुत  गहरा गरूर है

 

कुचले ग़रीबों  को पैरों तले वो ही

सत्ता का ही  चढ़ा ऐसा गरूर है

 

मैं तोड़ आया हूँ यूं प्यार का रिश्ता

आज़म बहुत उसका देखा गरूर है

 

❣️

शायर: आज़म नैय्यर

(सहारनपुर )

यह भी पढ़ें :-

नहीं घर में रोटी रखी हुई है | Poem on roti in Hindi

Similar Posts

  • जो मुमकिन हो | Ghazal Jo Mumkin ho

    जो मुमकिन हो ( Jo Mumkin ho ) मिलो जिनसे कभी, लहजा नरम रखना, जमीं पर तुम सदा अपने कदम रखना ।। बहक जाए नहीं इकदाम इशरत मे, अदावत में ज़रा अपना करम रखना ।। मुलाक़ातों का होगा सिलसिला कायम, मिलें नजरें तो आँखो मे शरम रखना।। बनाकर दूरिया चलना मुहब्बत में, फसाने मे हकीकत…

  • खूब उसने जफ़ा की | Jafa Shayari

     खूब उसने जफ़ा की ( Khoob usne jafa ki )   रोज़ जिससे दोस्ती में वफ़ा की साथ उसने रोज़ मुझसे दग़ा की भूल जाऊं बेवफ़ा को हमेशा खूब रब से रोज़ मैंनें दुआ की याद के उसकी भरे ज़ख्म कब है खूब ज़ख्मों की यहाँ दवा की देखिये वो बेवफ़ा की निग़ाहे प्यार की…

  • दीदार करें कैसे | Deedar Karen Kaise

    दीदार करें कैसे ( Deedar karen kaise ) दीदार करें कैसे, दिलदार बता देनाचाहत की जो रस्में हैं, हमको भी सिखा देना कानून से बढ़कर तो, होता ही नहीं कोईगर की है ख़ता मैंने, मुझको भी सज़ा देना हालात बहुत बिगडे़, जीना भी हुआ मुश्किलहैं संग बने इंसा, जीने की दुआ देना जागीर मुहब्बत की,…

  • मिरे पास ग़म के तराने बहुत है

    मिरे पास ग़म के तराने बहुत है गुल-ए-दर्द के से ख़ज़ाने बहुत हैं।मिरे पास ग़म के तराने बहुत है। न हो पाएगा तुम से इनका मुदावा।मिरे ज़ख़्मे-ख़न्दां पुराने बहुत हैं। जो आना है तो आ ही जाओगे वरना।न आने के दिलबर बहाने बहुत हैं। कहां तक छुपाऊं में चेहरे को अपने।तिरे शहर में जाम-ख़ाने बहुत…

  • बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँ

    बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँ बड़ा दिलकश मैं मंजर देखती हूँतेरी आँखों में सागर देखती हूँ हुई मा’दूम है इंसानियत अबहर इक इंसान पत्थर देखती हूँ पता वुसअत न गहराई है जिसकीवो सहरा दिल के अंदर देखती हूँ हुनर ज़िंदा रहेगा है ये तस्कींमैं हर बच्चे में आज़र देखती हूँ न ग़ालिब और कोई…

  • हमें आपसे | Ghazal Hame Aapse

    हमें आपसे  ( Hame Aapse ) हमें आपसे अब शिक़ायत नही है । मगर अब किसी से मुहब्बत नही है ।।१ झुके सिर हमारा किसी नाज़नी पे । अभी इस जहाँ में वो सूरत नहीं है ।।२ जिसे चाहने में भुलाया खुदी को । वही आज कहता हकीकत नही है ।।३ कसम आज अपनी उसे…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *