हिन्दी है अभिमान हमारा | Hindi hai Abhimaan Hamara

हिन्दी है अभिमान हमारा

( Hindi hai abhimaan hamara ) 

 

हिन्दी है अभिमान हमारा,
शब्दों का ये खेल है सारा।
स्वर व्यंजन से बना न्यारा,
मातृभाषा ये प्यारा-प्यारा।।

बिना इसके जीवन अधूरा,
ज्ञान का ये खज़ाना सारा।
काश्मीर से कन्या-कुमारी,
बोलें हिन्दुस्तान इसे सारा।।

विश्व प्रसिद्ध बनी ये भाषा,
है भारत का ये राजभाषा।
सुशोभित बिंदी हिंदी माथे,
रहें अमर भारत की भाषा।।

डैड-मौम ब्रो बोलें ना कोई,
अंग्रेजी अब छोड़ दो भाई।
राज आज हिन्दी के खोलो,
ताज पहनाओ हिंदी बोलों।।

 

रचनाकार : गणपत लाल उदय
अजमेर ( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

https://thesahitya.com/bitiya-mange-apna-hak/

Similar Posts

  • ब्याह | Byah

    ब्याह ( Byah )    तेरे आंगन की चिड़ियां बाबा एक दिन मैं उड़ जाऊंगी, दिखेगा चंदा सूरज तुझको पर मैं नजर ना आऊंगी। मंडप सजाया खुशियां मनाई सहरे सजें बाराती थे, वो तो तेरे दहेज के बाबुल आए बन सौगाती थे, तेरी आंखों ने सपने बुने थे गुड़ियां को ऐसे ब्याहूंगा, अपनी लाडो की…

  • स्मृति शेष | Kavita Smriti Shesh

    स्मृति शेष ( Smriti Shesh ) हे धरा के पंथी नमन तुम्हें हे धरा के पंथी नमन तुम्हें घर छूटा मिला गगन तुम्हें। तुम चले गए हमें छोड़कर कहे थे रहेंगे रिश्ते जोड़कर। तय था जो होना हो गया हे पंथी तुम नींद में सो गया। चिर शांति मिले अमन तुम्हें हे धरा के पंथी…

  • लाली उषा की | Lali Usha ki

    लाली उषा की ( Lali usha ki )   युगों की रची सांझ उषा की न पर कल्पना बिम्ब उनमें समाये बनाये हमने तो नयन दो मनुज के जहाँ कल्पना स्वप्न ने प्राण पाये। हंसी में खिली धूप में चांदनी भी दृगों में जले दीप मेघ छाये। मनुज की महाप्रणता तोड़कर तुम अजर खंड उसको…

  • गुरु कुम्हार | Kavita

    गुरु कुम्हार ( Guru kumhar )   गुरु कुम्हार शिष् कुंभ है गढ़ी गढ़ी कांठै खोट। अंतर हाथ सहार दे बाहर बाहे चोट। हर लेते हो दुख सारे खुशियों के फसल उगाते हो। अ से अनपढ़ ज्ञ से ज्ञानी बनाते हो। चांद पर पैर रखने की शिक्षा भली-भांति दे जाते हो। नेता, अभिनेता, डॉक्टर, इंजीनियर,…

  • कितने कर चुकाये | Kitne kar chukaye

    कितने कर चुकाये ( Kitne kar chukaye )   आयकर खाय कर खरीद कर पक गए आम आदमी यहां कर चुकाते थक गए   भूमिकर मकान कर संग दुकान कर दे दिया कितना कमाया उसका भी कर ले लिया   खरीद कर बेच कर सेवा कर रुक गए कितने कर चुकाये कर चुकाते थक गए…

  • आंचल की छांव | Kavita Aanchal ki Chhaon

    आंचल की छांव ( Aanchal ki chhaon )   वात्सल्य का उमड़ता सिंधु मां  के  आंचल  की  छांव सुख  का  सागर  बरसता जो  मां  के  छू  लेता  पांव   तेरे  आशीष  में  जीवन  है चरणों  में  चारो  धाम  मां सारी दुनिया फिरूं भटकता गोद  में  तेरे  आराम  मां   मेरे  हर  सुख  दुख  का पहले …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *