Hindi mein chhand

स्नेह तिलक | Hindi mein chhand

स्नेह तिलक

( Sneh Tilak )

भाई बहन का प्यार,
भैया दूज का त्यौहार।
लाया खुशियां अपार,
तिलक लगाइए।

 

अक्षत रोली ले आई,
खूब जियो मेरे भाई।
महके भैया संसार,
खुशियां मनाइए।

 

वैभव से भरा रहे,
भैया घर परिवार।
मंगलाचार बहना,
प्रीत भर गाइए।

 

गंगाजल सा पावन,
भाई बहन का प्यार।
नेह भरी बहार सा,
रिश्तो को निभाइए।

 

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

जीवन एक पहेली | Chhand jeevan ek paheli

Similar Posts

  • राम | घनाक्षरी छंद

    राम घनाक्षरी छंद ( 8,8,8,7 )   दोऊ भाई लगे प्यारे, बने धर्म के सहारे। फहराने धर्म ध्वजा, आये मेरे श्री राम।। दुखियों के दुख टारे, सब कुछ दिए वारे। वचन निभाने चले, वन को किए धाम।। राम -राज बना आज, पूरन हो सभी काज। बिगड़ी बनाते यही, रे – मन जपो नाम।। राम-राम रटे…

  • दिल का बहकना | Dil ka bahakna | Chhand

    दिल का बहकना ( Dil ka bahakna )   मनहरण घनाक्षरी   दिलकश हो नजारे, कोई हमको पुकारे। लगे स्वर्ग से सुंदर, महकती वादियां।   दिल दीवाना हो जाए, दिल कहीं पे खो जाए। प्रीत के तराने गाये, मन भाये शादियां।   झूम उठे तार सारे, बोल मीठे प्यारे प्यारे। दिल की धड़कनों में, बज…

  • कान्हा चले आएंगे | Chhand

    कान्हा चले आएंगे ( Kanha chale aayenge ) (  मनहरण घनाक्षरी छंद  )   मन में विश्वास रखो हृदय में आस रखो जगत के स्वामी खुद दौड़े चले आएंगे   मोहन मुरली धारी सुदर्शन चक्र धारी विपदा हरने प्रभु लीलायें रचाएंगे   मुरली की तान प्यारी ध्यान धरे नर नारी सुखचैन सुखदाता खुशियां लुटाएंगे  …

  • आधुनिक युग विवाह का चलन | मनहर घनाक्षरी छंद

    आधुनिक युग विवाह का चलन सुनो जी बात राज की व्यथा कहूं मैं आज की शादी वाले घर पर काज करवाते हैं बन्ना देखो हीरो लागे बन्नी जी हीरोइन लागे सौंदर्य घर जाकर साज करवाते हैं शादी के जी रश्म रीत भूले हैं शगुन गीत चूल्हा चौका सारे काम दूजा कर जाते हैं बड़ी शर्म…

  • ठिठुरन | Thithuran par chhand

    ठिठुरन ( Thithuran )   सर्द हवा ठंडी ठंडी, बहती है पुरजोर। ठिठुरते हाथ पांव, अलाव जलाइए। कोहरा ओस छा जाए, शीतलहर आ जाए। कंपकंपी बदन में, ठंड से बचाइए। सूरज धूप सुहाती, ठण्डक बड़ी सताती। रजाई कंबल ओढ़, चाय भी पिलाइए। बहता हवा का झोंका, लगता तलवारों सा। ठिठुरती ठंडक में, गर्म मेवा खाइए।…

  • दान और दक्षिणा | Chhand daan aur dakshina

    दान और दक्षिणा ( Daan aur dakshina )   मनहरण घनाक्षरी     दान दीजिए पात्र को, दक्षिणा विप्र जो होय। रक्तदान महादान, जीवन बचाइए।   पात्र सुपात्र को देख, दान जरूर कीजिए। अन्नदान सर्वोत्तम, भोजन खिलाइए।   अनुष्ठान करे कोई, जप तप पूजा-पाठ। ब्राह्मण भोजन करा, दक्षिणा दिलाइए।   तुलादान छायादान, कर सको कन्यादान।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *