Chhand jeevan ek paheli

जीवन एक पहेली | Chhand jeevan ek paheli

जीवन एक पहेली

( Jeevan ek paheli )

 

सुख-दुख के डोर सी, बड़ी सुहानी भोर सी।
जीवन एक पहेली, जीते चले जाइए।

 

हंसती खिलखिलाती, मंद मंद सी मुस्काती।
पल-पल आनंद के, खुशी से बिताइए।

 

प्रेम की बहती धारा, खुशियों भरी बहार।
महकती चमन की, खुशबू को पाइए।

 

समस्या समाधान भी, यश कीर्ति विधान भी।
पौरुष का परिचय, जिंदगी में लाइए।

 

?

रचनाकार : रमाकांत सोनी सुदर्शन

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

करवा चौथ | Chhand karva chauth

Similar Posts

  • लड्डू | Laddoo par Chhand

    लड्डू ( Laddoo ) मनहरण घनाक्षरी   गोल मटोल मधुर, मीठे मीठे खाओ लड्डू। गणपति भोग लगा, मोदक भी दीजिए।।   गोंद मोतीचूर के हो, तिल अजवाइन के। मेथी के लड्डू खाकर, पीड़ा दूर कीजिए।।   खुशी के लड्डू मधुर, खूब बांटो भरपूर। खुशियों का चार गुना, मधु रस पीजिए।।   शादी समारोह कोई, पर्व…

  • अहसास | Ahsas par Chhand

    अहसास ( Ahsas )   सुहाना अहसास हो, मेरे दिल के पास हो। लगता कोई खास हो, मन मीत आइए।   मधुर संगीत कोई, तराना हो प्यार भरा। जिंदगी के सफर में, सदा मुस्कुराइए।   महकती बयार हो, अहसास खुशियों का। मधुर मुस्कान कोई, लबों पर लाइए।   सावन बरसता हो, या तुम घटाएं काली,…

  • श्रीकृष्ण | Shri Krishna chhand

    श्रीकृष्ण ( Shri Krishna )   मनहरण घनाक्षरी   माधव मुरली वाले, गोकुल के घनश्याम। नंदलाल गिरधारी, लीलायें रचाइये।   यशोदा के राजदुलारे, जन जन के सहारे। चक्र सुदर्शन धारी, मुरली बजाइए।   राधा के मोहन प्यारे, जग के तारणहारे। जय हो तेरी केशव, विपद निवारिये।   सखा सुदामा हे कृष्णा, करुणासागर कान्हा। भक्तों के…

  • चुगली रस | Chhand in Hindi

    चुगली रस ( Chugli Ras ) मनहरण घनाक्षरी   चुगलखोर कान में, भरते रहते बात। चुगली रस का सदा, रसपान वो करें।   कैकई कान की कच्ची, मंथरा की मानी बात। चौदह वर्ष राम को, वनवास जो करें।   चिकनी चुपड़ी बातें, मीठी मीठी बोलकर। कानाफूसी पारंगत, चुगलियां वो करें।   चुगली निंदा जो करे,…

  • कालरात्रि | Chhand kalratri

    कालरात्रि ( Kalratri ) मनहरण घनाक्षरी   काली महाकाली दुर्गा, भद्रकाली हे भैरवी। चामुंडा चंडी रुद्राणी, कृपा मात कीजिए।   प्रेत पिशाच भूतों का, करती विनाश माता। सिद्धिदात्री जगदंबे, ज्ञान शक्ति दीजिए।   अग्नि ज्वाला से निकले, भयानक रूप सोहे। खड्ग खप्पर हाथ ले, शत्रु नाश कीजिए।   रूद्र रूप कालरात्रि, पापियों का नाश करें।…

  • सुपात्र | Supatra par chhand

    सुपात्र ( Supatra par chhand ) सद्गुणों से भरपूर, कला से हो मशहूर। सुपात्र का हो सम्मान, कदम बढ़ाइए। विनय भाव संस्कार, दूर हो सारे विकार। जग बांटे प्रेम प्यार, उनको बुलाइए। दया धर्म दानशील, शुभ कर्म हो सुशील। गुणी विद्वान मनुज, संग में बिठाइए। कर्मवीर रणधीर, पुरुषार्थी नर वीर। सेवाभावी जान कोई, सम्मान दिलाइए।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *