Hindi Poem Shak

शक | Hindi Poem Shak

शक

( Shak )

 

बिना पुख़्ता प्रमाण के
शक बिगाड़ देता है संबंधों को
जरा सी हुई गलतफहमी
कर देती है अलग अपनों को

काना फुसी के आम है चर्चे
तोड़ने में होते नहीं कुछ खर्चे
देखते हैं लोग तमाशा घर का
बिखर जाता है परिवार प्रेम का

ईर्ष्या में अपने भी हो जाते हैं गैर
आपस में ही बढ़ा देते हैं बैर
समझे बिना निर्णय लेना नहीं
भेद घर के अपने कभी देना नहीं

बैठ कर भी समाधान हो जाता है
स्पष्ट कर लेने में जाता ही क्या है
हो जाए तने से अलग शाख यदि
तो सूख जाती हैं पत्तियां भी बचा क्या है

सुलझ ही जाती हैं उलझी हुई बातें
होते हैं अनमोल बड़े सभी रिश्ते नाते
आते हैं काम अपने ही वक्त आने पर
मेल के खातिर आप रहें सदैव तत्पर

मोहन तिवारी

( मुंबई )

https://thesahitya.com/web-stories/hindi-poem-shak/

यह भी पढ़ें :-

मंथन | Manthan

Similar Posts

  • कोरोना का रोना | Corona ke upar kavita

    कोरोना का रोना ( Corona ka rona ) –> कोरोना का रोना है , हाँ हाँ कार मची है दुनियां मे || 1.कोरोना वायरस फैल रहा,जाने कैसी बीमारी है | रोका नहीं गया इसको तो,आगे चल के महामारी है | इसके बारे मे कुछ पता नहीं,अभी ये बन्द अलमारी है | हमको ही मिलकर लडना…

  • पाठशाला | Pathshala kavita

    पाठशाला ( Pathshala )   जीवन की है पाठशाला भरा पूरा परिवार सद्भावो की पावन गंगा बहती मधुर बयार   शिक्षा का मंदिर पावन गांव की वो पाठशाला सदा ज्ञान की ज्योत जलाते ले अंदाज निराला   पाठशाला में पढ़ाई कर कितने विधायक हो गए भाग दौड़ भरी दुनिया जाने कही भीड़ में खो गए…

  • सोचना आपको है | Sochna Aapko hai

    सोचना आपको है ( Sochna aapko hai )    जानता हूं तुम गलत नही थे कभी न ही बैर था किसी से तुम्हारा गलत रहा तो बस तुम्हारी सोच का नजरिया और तुम्हारी संगत…. अपनों पर किए शक गैरों पर जताया भरोसा मीठी बोली मै रहा व्यंग छिपा आंखों मे दबी वासना रही जल्दबाजी की…

  • ब्याह | Byah

    ब्याह ( Byah )    तेरे आंगन की चिड़ियां बाबा एक दिन मैं उड़ जाऊंगी, दिखेगा चंदा सूरज तुझको पर मैं नजर ना आऊंगी। मंडप सजाया खुशियां मनाई सहरे सजें बाराती थे, वो तो तेरे दहेज के बाबुल आए बन सौगाती थे, तेरी आंखों ने सपने बुने थे गुड़ियां को ऐसे ब्याहूंगा, अपनी लाडो की…

  • कैसी बीत गए तुम्हारे साथ | Romantic kavita

    कैसी बीत गए तुम्हारे साथ ( Kaisi beet gaye tumhare saath )   कैसी बीत गए तुम्हारे साथ । कितने पल कितने साल। सच कहूं वह बीते दिन थे बेमिसाल। आज भी चुपके से,तुमको कभी, जी भर के देख लेती हूं नजर चुरा कर। नोकझोंक करती हूं , बस रखती हूं प्यार छुपा कर। आज…

  • कूटने से बढ़ती है – “इम्युनिटी पॉवर”

    कूटने से बढ़ती है – “इम्युनिटी पॉवर” मैंने काफी बुजुर्गबुजुर्ग जी से पूछाकि पहले लोग इतनेबीमार नही होते थे ?जितने आज हो रहे है …. तो बुजुर्ग जी बोलेबेटा पहले हमहर चीज को कूटते थेजबसे हमने कूटनाछोड़ा है, तबसे हीहम सब बीमारहोने लग गए है….. मैंने पूछा :- वो कैसे ?बुजुर्ग जी मुस्कुराते हुएजैसे पहले…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *