Hindi poetry

सच का पता आसान नहीं है | Hindi poetry

सच का पता आसान नहीं है

( Sach ka pata aasan nahin hai )

 

तूफां से भिड़ना पड़ता है आंधी से लड़ना पड़ता है
उर हौसला दुर्गम पथ पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता है

 

नदी नाले कंटक राहों का पथिक कहो ज्ञान नहीं है
सत्य की राह चलना सच का पथ आसान नहीं है

 

मुश्किलें बाधाओं से हमें हिम्मत से टकराना होगा
कभी भंवर में अटकी नैया मांझी पार लगाना होगा

 

झूठ कपट स्वार्थ का भी शायद ये अनुमान नहीं है
स्वार्थ भरी दुनिया में सच का पथ आसान नहीं है

 

जो हिमालय बने बैठे जाने किस मद का अभिमान
शील  सादगी  विनय  भूल औरों का करते अपमान

 

समय सदा ना रहे एकसा कहो शायद भान नहीं है
संघर्षों से लड़ते रहना सच का पथ आसान नहीं है

 

   ?

कवि : रमाकांत सोनी

नवलगढ़ जिला झुंझुनू

( राजस्थान )

यह भी पढ़ें :-

मैं कविता की हूंकारो से | Kavita

Similar Posts

  • कुर्सी की लड़ाई | Political Kavita

    कुर्सी की लड़ाई ( Kursi ki ladai )   बड़े-बड़े दिग्गज उतरेंगे, महासमर चुनाव में। कुर्सी की खातिर नेताजी, होंगे खड़े कतार में।   राजनीति की सेंके रोटियां, सत्ता के गलियारों में। वोटों का बाजार गर्म हो, वादों की भरमारों से।   कुर्सी की लड़ाई में फिर, उठा पटक जारी होगी। शह मात का खेल…

  • ख्वाब और हकीकत | Poem khwab aur haqeeqat

    ख्वाब और हकीकत ( Khwab aur haqeeqat )   अब ख्वाबों में नहीं  हकीकत जीता हूं यारों,        ख्वाब सूर्य पकड़ा        हकीकत जुगनू…. ख्वाब समुद्र में डुबकी लगाया हकीकत तालाब …..         अब ख्वाबों में नहीं         हकीकत जीता हूं यारों, ख्वाब  ईश्वर, पवन…

  • ई वी एम का बटन दबाना है

    ई वी एम का बटन दबाना है   चलो पड़ोसी आज सुबह,हमें ईवीएम बटन दबाना है। जनता का विश्वास जीत,अब नई सरकार बनाना है। बेरोजगारी को जड़ से मिटा,भारत  संपन्न बनाना है। बेटा बेटी दादा दादी मम्मी पापा संग जाना है। अपना अधिकार जान कर,अब ईवीएम बटन दबाना है। अपने मर्जी के हैं मालिक, अपनी…

  • मेरी चाहत | Meri chaahat

    मेरी चाहत ( Meri chaahat )    परखने की कोशिश तो सभी ने की समझना किसी ने न चाहा गुजर गई जिंदगी इम्तिहान में मगर अब फर्क नहीं पड़ता की कौन क्या समझता है मुझे मैं स्वयं में सत्य निष्ठ हूं और संतुष्ट भी ना लोभ है ना उम्मीद की लालसा मिले सम्मान या अपमान…

  • दिल से पूछो | Dil se Pucho

    दिल से पूछो ( Dil se pucho )   विश्व के धरातल पर ,था सनातन फैला हुआ हुई क्या कमी ऐसी की आज वह मैला हुआ भूभाग अछूता था नही, कल कोई हिंदुत्व से सिमट कर रह गए, क्यों हम अपने कर्तव्य से आतंकियों के समर मे, हटते गए हम सदा भाई ही भाई के…

  • करगिल जंग | Kavita Kargil Jung

    करगिल जंग ( Kargil Jung ) युद्ध के उस रंग में, दुश्मन के साथ जंग में, बहादुरी दिखा रहे थे हमारे रणबाँकुरे। टाइगर हिल हो या हो द्रास की वो पहाड़ियों, फिर से उसको हासिल कर रहे थे रणबाँकुरे। एटम-बम को जो गहना पहनाकर वो बैठे हैं, अधोपतन का उत्तर वो दे रहे थे रणबाँकुरे।…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *